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ZSI का 111वां स्थापना दिवस: ATS 2026 की शुरुआत, भारत की जैव विविधता पर बड़े खुलासे

भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) ने कोलकाता में अपना 111वां स्थापना दिवस मनाते हुए तीन दिवसीय एनिमल टैक्सोनॉमी समिट (ATS 4.0) 2026 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कई महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन किया। कार्यक्रम में भारत की जैव विविधता, नई प्रजातियों की खोज और संरक्षण से जुड़ी कई अहम उपलब्धियां सामने आईं।

111वें स्थापना दिवस पर शुरू हुआ एनिमल टैक्सोनॉमी समिट

भारतीय प्राणी सर्वेक्षण ने 30 जून 2026 को कोलकाता में अपना 111वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय एनिमल टैक्सोनॉमी समिट (ATS 4.0) का उद्घाटन केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल सरकार के प्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों और देशभर से आए विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य भारत की जैव विविधता, पशु वर्गीकरण और संरक्षण से जुड़े नवीनतम शोध एवं नीतिगत पहल पर चर्चा करना है।

‘पशु खोज-2025’ रिपोर्ट में सामने आई नई उपलब्धियां

सम्मेलन के दौरान ‘पशु खोज-2025’ और ‘पादप खोज-2025’ रिपोर्ट जारी की गई। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में विज्ञान के लिए 483 नई जीव प्रजातियों की पहचान की गई, जबकि 226 प्रजातियां पहली बार भारत में दर्ज की गईं। इसके साथ ही भारत में दर्ज कुल जीव-जंतुओं की संख्या बढ़कर 1,05,953 प्रजातियां हो गई है। यह उपलब्धि भारत को दुनिया के सबसे समृद्ध जैव विविधता वाले देशों में और मजबूत स्थान दिलाती है।

केरल रहा नई प्रजातियों की खोज में सबसे आगे

रिपोर्ट के मुताबिक नई प्रजातियों की खोज में केरल सबसे आगे रहा, जहां 98 नई प्रजातियां दर्ज की गईं। इसके बाद पश्चिम बंगाल (76), कर्नाटक (67) और अरुणाचल प्रदेश (65) का स्थान रहा। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन राज्यों के विविध पारिस्थितिक तंत्र और समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों के कारण यहां जैव विविधता पर शोध के बेहतर अवसर उपलब्ध हैं।

डिजिटल संरक्षण को मिला नया आयाम

कार्यक्रम के दौरान भारत के जीव-जंतुओं की सूची (Fauna of India Checklist) Version 3.0 भी जारी की गई, जिसमें 121 श्रेणियों के अंतर्गत 1,05,953 प्रजातियों का विस्तृत विवरण शामिल है। साथ ही पैलियोइंडिया पोर्टल की शुरुआत की गई, जिसे ZSI और राष्ट्रीय सतत तटीय प्रबंधन केंद्र (NCSCM) ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देशभर के 5,000 से अधिक जीवाश्म नमूनों का वैज्ञानिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे शोध और संरक्षण कार्यों को नई गति मिलेगी।

111 घंटे के हैकाथॉन और वैज्ञानिक सम्मेलन पर रहा फोकस

स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित 111 घंटे के राष्ट्रीय हैकाथॉन का भी सफल समापन किया गया। इसका उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के बीच समन्वय स्थापित करना था। वहीं, ATS 4.0 में देशभर से आए 500 से अधिक वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन में जैव विविधता संरक्षण, पशु वर्गीकरण और भविष्य की संरक्षण नीतियों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनके आधार पर आने वाले समय में नीति निर्माण को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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