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G20 समिट पर अमेरिका–दक्षिण अफ्रीका टकराव: ट्रंप प्रशासन बोला—“बहुत ज़्यादा बोल रहे हो” और किया बायकॉट का ऐलान….

जोहान्सबर्ग में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन से ठीक पहले अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका के बीच कूटनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। दक्षिण अफ्रीका ने दावा किया था कि अमेरिका ने आखिरी मौके पर अपना बायकॉट फैसला बदला है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इसे सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया—अमेरिका किसी भी आधिकारिक G20 वार्ता में हिस्सा नहीं लेगा, केवल समापन पर मौजूद रहेगा।

शिखर सम्मेलन से पहले बढ़ा तनाव: अमेरिका ने किया बायकॉट का खंडन

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने कहा था कि अमेरिका ने शिखर सम्मेलन में शामिल होने पर पुनर्विचार किया है। लेकिन गुरुवार को ट्रंप प्रशासन ने इसे “गलत दावा” बताते हुए साफ किया कि अमेरिका किसी भी बातचीत में भाग नहीं लेगा।

अमेरिका की पोज़िशन: केवल ‘हैंडओवर सेरेमनी’ में मौजूदगी

व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधि सिर्फ हैंडओवर सेरेमनी में शामिल होंगे क्योंकि अगला G20 शिखर सम्मेलन अमेरिका में आयोजित होना है। औपचारिक चर्चाओं में वे हिस्सा नहीं लेंगे।

हफ्तों से चली आ रही तनातनी बनी वजह

दोनों देशों के बीच तनाव पिछले कई हफ्तों से बढ़ रहा है। अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका पर गोरे किसानों के खिलाफ भेदभाव का आरोप लगाता रहा है। इसी पॉलिटिकल माहौल के बीच G20 समिट का विवाद और गहरा हो गया है।

व्हाइट हाउस का सख्त बयान—“अमेरिका को आपका टोन पसंद नहीं आया”

व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति रामफोसा का अमेरिका और ट्रंप प्रशासन के खिलाफ “मुंह चलाना” उनकी टीम को पसंद नहीं आया। यही बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

दक्षिण अफ्रीका का दावा—“अमेरिका का मन बदला था”

रामफोसा ने कहा था कि अमेरिका का रुख बदलना एक सकारात्मक संकेत है। उनके मुताबिक, “दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को G20 में मौजूद रहना चाहिए।’’ लेकिन अमेरिका इस दावे को स्वीकार करने से इंकार कर चुका है।

अमेरिकी दूतावास पहले ही भेज चुका था ‘नॉ-गो’ नोटिस

दक्षिण अफ्रीका में अमेरिकी दूतावास ने पहले ही स्पष्ट किया था कि वह वार्ता में शामिल नहीं होगा। दूतावास के पत्र में कहा गया—दक्षिण अफ्रीका की G20 प्राथमिकताएँ “अमेरिकी नीति से मेल नहीं खातीं” और इसलिए किसी भी दस्तावेज़ पर सहमति देने का सवाल नहीं उठता।

क्यों बड़ा है यह कूटनीतिक विवाद?

G20 जैसे वैश्विक मंच पर अमेरिका का बायकॉट संकेत देता है कि वॉशिंगटन और प्रिटोरिया के बीच मतभेद गहरे होते जा रहे हैं। इसका प्रभाव G20 की सामूहिक निर्णय-प्रक्रिया और वैश्विक आर्थिक सहयोग पर भी पड़ सकता है।

अगला G20 अमेरिका में—फिर भी वार्ता से दूरी

अगला G20 सम्मेलन अमेरिका में फ्लोरिडा स्थित ट्रंप के एक प्रॉपर्टी में होने वाला है, इसके बावजूद अमेरिका का इस साल की वार्ता से दूरी बनाना राजनीतिक संदेश देता है कि वह दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता से असहमत है।

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