‘रूस यूक्रेन भी नहीं जीत सकता, यूरोप पर हमला तो दूर की बात’: अमेरिकी खुफिया प्रमुख का बड़ा बयान
पश्चिमी नैरेटिव पर सीधा प्रहार
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर पश्चिमी देशों में फैलाए जा रहे डर के माहौल पर अमेरिका की शीर्ष खुफिया अधिकारी ने सीधा सवाल खड़ा किया है। अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने साफ कहा है कि रूस के पास न तो यूक्रेन पर पूरी तरह कब्जा करने की क्षमता है और न ही यूरोप पर हमला करने की कोई ताकत।
🧠 अमेरिकी खुफिया आकलन क्या कहता है
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए पोस्ट में तुलसी गबार्ड ने लिखा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन के मुताबिक रूस यूक्रेन को जीतने की स्थिति में भी नहीं है। ऐसे में यह दावा करना कि वह पूरे यूरोप या नाटो देशों पर हमला कर सकता है, पूरी तरह भ्रामक है।
⚠️ ‘युद्ध समर्थक नैरेटिव’ पर आरोप
गबार्ड ने पश्चिमी मीडिया और कुछ राजनीतिक समूहों पर आरोप लगाया कि वे जानबूझकर ऐसे खतरनाक दावे फैला रहे हैं, ताकि युद्ध-समर्थक नीतियों को सही ठहराया जा सके। उनके मुताबिक, रूस को यूरोप के लिए बड़े खतरे के रूप में पेश करना शांति प्रयासों को नुकसान पहुंचा रहा है।
🤝 ट्रंप के शांति प्रयासों को कमजोर करने का आरोप
अमेरिकी खुफिया प्रमुख ने कहा कि ये दावे सीधे तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति प्रयासों को कमजोर करने की कोशिश हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तथाकथित ‘डीप स्टेट’ और उसका प्रोपेगेंडा मीडिया यूक्रेन और यूरोप में शांति की किसी भी संभावना को पटरी से उतारना चाहता है।
🗣️ EU-NATO के दावों से असहमति
तुलसी गबार्ड ने स्पष्ट किया कि यह दावा गलत है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां EU और NATO के उस दृष्टिकोण से सहमत हैं, जिसमें कहा जाता है कि रूस का अंतिम लक्ष्य यूरोप पर आक्रमण करना और उसे जीतना है।
उनके मुताबिक, इस तरह की बातें सिर्फ सैन्य बजट और युद्ध नीति के समर्थन के लिए फैलाई जा रही हैं।
🇷🇺 पुतिन भी पहले कर चुके हैं इनकार
इससे पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी ऐसे आरोपों को खारिज कर चुके हैं। रूस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन ने हाल ही में कहा था कि रूस के यूरोपीय यूनियन देशों पर हमले की बातें “झूठ और बकवास” हैं।
उन्होंने पश्चिमी नेताओं पर आरोप लगाया था कि वे बढ़ते सैन्य खर्च को सही ठहराने के लिए डर का इस्तेमाल कर रहे हैं।
डर की राजनीति बनाम जमीनी हकीकत
अमेरिकी खुफिया प्रमुख का यह बयान पश्चिमी देशों में प्रचलित उस धारणा को चुनौती देता है, जिसमें रूस को पूरे यूरोप के लिए अस्तित्वगत खतरे के रूप में दिखाया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रूस वास्तव में यूक्रेन में निर्णायक जीत हासिल नहीं कर पाया है, तो यूरोप पर हमले की बात रणनीतिक से ज्यादा राजनीतिक प्रचार लगती है। यह बयान आने वाले समय में नाटो, यूरोप और अमेरिका की युद्ध नीति पर बहस को और तेज कर सकता है।