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US Birthright Citizenship: सुप्रीम कोर्ट ने जन्मसिद्ध नागरिकता बरकरार रखी, भारतीय परिवारों को मिली बड़ी राहत

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता (Birthright Citizenship) को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को असंवैधानिक ठहराया, जिसमें कुछ श्रेणी के अस्थायी प्रवासियों के बच्चों की नागरिकता सीमित करने की कोशिश की गई थी। इस फैसले से अमेरिका में अस्थायी वीजा पर रह रहे हजारों भारतीय परिवारों को बड़ी राहत मिली है।

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के आदेश को किया खारिज

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने वाला कार्यकारी आदेश अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन (14th Amendment) के अनुरूप नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को संविधान के तहत नागरिकता का अधिकार प्राप्त है और केवल कार्यकारी आदेश के जरिए इस संवैधानिक व्यवस्था को बदला नहीं जा सकता। कोर्ट ने अपने फैसले में 150 वर्ष से अधिक पुरानी संवैधानिक परंपरा और न्यायिक व्याख्या को बरकरार रखा।

अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को मिलती रहेगी नागरिकता

फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को जन्म के आधार पर नागरिकता मिलती रहेगी, भले ही उनके माता-पिता H-1B, L-1, स्टूडेंट वीजा या अन्य वैध अस्थायी वीजा पर रह रहे हों। अदालत ने माना कि जन्मसिद्ध नागरिकता का सिद्धांत अमेरिकी संविधान में निहित है और इसे सीमित करने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया आवश्यक होगी, न कि केवल राष्ट्रपति का कार्यकारी आदेश।

भारतीय पेशेवरों के लिए क्यों है अहम फैसला?

यह निर्णय विशेष रूप से उन हजारों भारतीय परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो रोजगार या शिक्षा के लिए अमेरिका में अस्थायी वीजा पर रह रहे हैं। भारतीय नागरिक H-1B वीजा श्रेणी में सबसे बड़ी संख्या में शामिल हैं और टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवाओं तथा वित्तीय क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लंबे समय तक ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा के दौरान उनके परिवारों के सामने नागरिकता को लेकर जो अनिश्चितता थी, इस फैसले से उसमें काफी हद तक स्पष्टता आ गई है।

ग्रीन कार्ड का लंबा इंतजार बना रहता है चुनौती

अमेरिका में प्रत्येक देश के लिए ग्रीन कार्ड जारी करने की वार्षिक सीमा तय है। इसी वजह से बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवरों को स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) के लिए कई वर्षों, और कुछ मामलों में दशकों तक इंतजार करना पड़ता है। इस दौरान वे अस्थायी वीजा पर ही रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह सुनिश्चित हुआ है कि इस अवधि में अमेरिका में जन्म लेने वाले उनके बच्चों की नागरिकता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

1898 के ऐतिहासिक फैसले का भी दिया हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में United States v. Wong Kim Ark (1898) मामले का उल्लेख किया, जिसने जन्मसिद्ध नागरिकता के सिद्धांत को मजबूत आधार दिया था। अदालत ने दोहराया कि अमेरिका की धरती पर जन्म लेने वाले अधिकांश बच्चों को नागरिकता का अधिकार प्राप्त है। केवल कुछ विशेष परिस्थितियों, जैसे विदेशी राजनयिकों या शत्रु सेना के सदस्यों के बच्चों, को इस प्रावधान से अलग माना जाता है। इस फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट ने दशकों से लागू संवैधानिक व्याख्या को फिर से कायम रखा।

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