मानगढ़ धाम पर संसद से सियासत तक घमासान, बेनीवाल के सवाल पर केंद्र का जवाब और फिर तेज हुई राजनीतिक बहस
राजस्थान के बांसवाड़ा स्थित मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। लोकसभा में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने कहा कि वर्तमान कानूनी मानकों के अनुसार मानगढ़ धाम राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किए जाने के योग्य नहीं पाया गया है। इस जवाब के बाद राजस्थान में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। RLP और कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि केंद्र ने अपना पक्ष संसद में स्पष्ट किया है।
लोकसभा में बेनीवाल के सवाल पर केंद्र ने क्या जवाब दिया?
संसद के मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सांसद हनुमान बेनीवाल ने मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने और उसके विकास को लेकर केंद्र सरकार से सवाल पूछा। जवाब में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि ‘प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958’ के तहत निर्धारित मानकों के अनुसार मानगढ़ धाम राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किए जाने के लिए पात्र नहीं पाया गया है। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में इस संबंध में कोई प्रस्ताव लंबित या विचाराधीन नहीं है।
हनुमान बेनीवाल बोले- इतिहास का मूल्य केवल इमारतों से नहीं होता
केंद्र सरकार के जवाब पर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मानगढ़ धाम केवल कोई पुरातात्विक स्थल नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के बलिदान, स्वाभिमान और स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक है। बेनीवाल ने कहा कि वर्ष 1913 में अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष के दौरान बड़ी संख्या में आदिवासी शहीद हुए थे और इस ऐतिहासिक घटना का मूल्यांकन केवल पुरानी इमारतों के आधार पर नहीं किया जा सकता। उन्होंने केंद्र सरकार से मानगढ़ धाम के लिए विशेष राष्ट्रीय स्मृति एवं जनजातीय गौरव संरक्षण योजना बनाने और इसे राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की मांग दोहराई।
कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना
केंद्र के जवाब के बाद राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार पर आदिवासी समाज की भावनाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और भाजपा ने पहले मानगढ़ धाम के विकास और जनजातीय गौरव से जुड़े बड़े वादे किए थे, लेकिन अब संसद में इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने योग्य नहीं बताया जा रहा है। जूली ने यह भी कहा कि पहले राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण की ओर से मानगढ़ धाम को लेकर सिफारिश किए जाने की बात सामने आई थी। उन्होंने केंद्र सरकार और भाजपा के जनप्रतिनिधियों से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।
स्थानीय चुनावों से पहले गर्माई राजनीति
मानगढ़ धाम का मुद्दा ऐसे समय सामने आया है जब राजस्थान में पंचायती राज और नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियां तेज हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी बहुल जिलों—बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और उदयपुर—में यह मुद्दा चुनावी बहस का प्रमुख विषय बन सकता है। हालांकि, मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने को लेकर केंद्र सरकार का आधिकारिक रुख संसद में स्पष्ट हो चुका है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। आगे इस विषय पर केंद्र या राज्य सरकार की ओर से कोई नई पहल होती है या नहीं, इस पर सभी की नजर रहेगी।
इसे भी पढ़ें – अमृतसर में दो कथित ISI मॉड्यूल का भंडाफोड़, 9 गिरफ्तार; जंतर-मंतर कनेक्शन की जांच तेज