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तिजारा में अवैध क्रशर पर मासूम की दर्दनाक मौत: प्रशासन की लापरवाही और खनन माफिया की मिलीभगत पर उठे सवाल…

राजस्थान के तिजारा क्षेत्र के हसनपुर माफी गांव में 20 नवंबर की शाम एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। गांव में चल रहे एक क्रशर पर काम करने वाले दंपति की 4 साल की बेटी परी गिट्टी के गहरे गड्ढे में जा गिरी। ऊपर से लगातार गिरती गिट्टियों के नीचे दबकर उसकी मौत हो गई। यह हादसा क्रशर पर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है और यह भी दिखाता है कि ग्रैप-3 लागू होने के बावजूद अवैध खनन व क्रशर किस तरह बेरोकटोक चल रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के शंकरगढ़, जिला इलाहाबाद के निवासी मजदूर दंपति अमित और उनकी पत्नी क्रशर पर काम करते है । इसी दौरान उनकी चार साल की बेटी परी खेलते-खेलते गिट्टी के गड्ढे की ओर चली गई और करीब 12-15 फीट नीचे जा गिरी। मशीनों के तेज शोर के कारण किसी को कुछ पता नहीं चला।

काफी देर तक बच्ची नहीं दिखने पर उसकी छोटी बहन ने इशारा किया जिसके बाद मजदूरों ने घबराकर जेसीबी से खुदाई शुरू की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। परी का शव गहरे मलबे से बरामद किया गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल है।

अब एक बड़ा सवाल पूरे एनसीआर में ग्रैप-3 की पाबंदियां लागू है खासकर भिवाड़ी में एक्यूआई रेड सीमा को टच कर रहा है फिर भी इन पाबंदियों के बावजूद क्रशर धड़ल्ले से चल रहे है ।

यह घटना तिजारा के हसनपुर माफी गांव की है , लेकिन तिजारा क्षेत्र में ऐसे सैकड़ों क्रशर और माइन अवैध रूप से लगातार काम कर रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक हादसे के बाद क्रशर मालिकों ने मृतका के माता-पिता पर दबाव बनाया और बिना पुलिस को सूचना दिए शव का अंतिम संस्कार कराने की कोशिश की। लेकिन किसी की सूचना पर पुलिस पहुंच गई और पोस्टमार्टम करवाया।

तिजारा थाना अधिकारी जयप्रकाश ने इसे साफ-सफाई के दौरान हुई दुर्घटना बताया।
उनके अनुसार बच्ची गिट्टी के ढेर में पैर फिसलने से गिरी और दम घुटने से मौत हो गई। पुलिस ने समझाइश के बाद पोस्टमार्टम कर शव सुपुर्द कर दिया।

लेकिन विधायक बालक नाथ ने इसे हत्या करार दिया। उन्होंने कहा—

“अगर क्रशर बंद था तो 15 फीट गहरा गड्ढा कैसे था? ऊपर से गिट्टी कैसे गिर रही थी? यह दुर्घटना नहीं, हत्या है। मैं बच्ची को न्याय दिलवाऊंगा।”

स्थानीय लोगों और विधायक महंत बाबा बालक नाथ का आरोप है कि
“प्रदूषण विभाग, लेबर विभाग, पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत के कारण किसी पर कार्रवाई नहीं होती।”

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी उड़ रही धज्जियां

“अरावली में खनन पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त प्रतिबंध है। लेकिन यहां प्रशासन और खनन माफियाओं का गठजोड़ इतना मजबूत है कि आदेशों की खुली अवहेलना हो रही है। पुलिस हो या प्रदूषण विभाग—कोई कार्रवाई ही नहीं करता।”जबकि इन दिनों पॉल्यूशन के चलते ग्रेप की पाबंदियां भी लागू है बावजूद उसके यह घटना प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत की और इशारा करती है ।

पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड अधिकारी अमित जुयाल ने बताया कि—
15 नवंबर को टीम बनाकर तिजारा और आसपास सर्वे कराया गया लेकिन “हमें सभी क्रशर और ईंट भट्टे बंद मिले”

यदि ग्रैप-3 के बाद कोई क्रशर चलता पाया गया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी फैक्ट्री इंस्पेक्टर जगमोहन मीणा का बयान उन्हें घटना की कोई जानकारी नहीं, यह बयान खुद प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही और जिम्मेदारी से दूरी को दर्शाता है।

परी की मौत ने तिजारा क्षेत्र में अवैध खनन, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उपेक्षा की कड़वी सच्चाई उजागर कर दी है।
सवाल अब भी खड़े हैं—

ग्रैप-3 के बावजूद क्रशर चल कैसे रहे हैं?

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कौन करवाएगा?

परिजनों को गायब कराने की कोशिश किसने की?

बच्ची की मौत को दुर्घटना बताकर किसे बचाया जा रहा है?

अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक चुप रहता है और क्या इस संवेदनशील मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर यह भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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