‘द केरल स्टोरी-2’ विवाद के बीच बड़ा कदम, केरल हाईकोर्ट के लिए होगी फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग
फिल्म The Kerala Story 2 को लेकर जारी विवाद के बीच मेकर्स ने बड़ा फैसला लिया है। रिलीज से पहले Kerala High Court के लिए फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की जाएगी, ताकि अदालत फिल्म की सामग्री पर स्वयं विचार कर सके। इस बीच सेंसर बोर्ड फिल्म को सर्टिफिकेट देते हुए कई बदलाव भी सुझा चुका है।
⚖️ कोर्ट स्क्रीनिंग: विवाद के बीच संतुलन की कोशिश
सूत्रों के मुताबिक फिल्म की रिलीज से पहले हाईकोर्ट के जजों के लिए विशेष स्क्रीनिंग रखी जाएगी। स्क्रीनिंग के बाद अदालत की ओर से आगे की टिप्पणी या निर्देश सामने आ सकते हैं।
यह कदम दर्शाता है कि फिल्म को लेकर बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक विवाद के बीच निर्माता कानूनी पारदर्शिता दिखाना चाहते हैं।
🗣️ मुख्यमंत्री के बयान से बढ़ा विवाद
केरल के मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan ने हाल ही में फिल्म पर सवाल उठाते हुए कहा था कि केरल को “आतंकवाद का केंद्र” दिखाने की कोशिशों को खारिज किया जाना चाहिए।
उन्होंने राज्य की सेक्युलर छवि और सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी कथित प्रोपेगैंडा का विरोध करने की बात कही।
राजनीतिक प्रतिक्रिया के बाद यह मामला सिर्फ फिल्मी विवाद नहीं बल्कि वैचारिक बहस का रूप ले चुका है।
🎥 फिल्म इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया भी तेज
ट्रेलर रिलीज के बाद फिल्मकार Anurag Kashyap ने फिल्म को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए इसे प्रोपेगैंडा बताया था। सोशल मीडिया पर भी फिल्म को लेकर समर्थन और विरोध दोनों देखने को मिल रहे हैं।
ऐसे मामलों में सोशल मीडिया नैरेटिव अक्सर फिल्म की रिलीज से पहले ही माहौल तय कर देता है।
📜 सेंसर बोर्ड से U/A सर्टिफिकेट, 17 बदलाव अनिवार्य
Central Board of Film Certification (CBFC) ने फिल्म को U/A सर्टिफिकेट दिया है, लेकिन 17 संशोधनों और तकनीकी बदलावों की शर्त रखी गई है।
मुख्य बदलावों में शामिल हैं:
- सच्ची घटनाओं पर आधारित डिस्क्लेमर जोड़ना
- हिंसा और संवेदनशील दृश्यों की अवधि कम करना
- कुछ संवादों में संशोधन और शब्द म्यूट करना
- रेप और मारपीट से जुड़े विजुअल्स कम करना
- एंटी-टोबैको चेतावनी जोड़ना
- कुल 31 सेकंड फुटेज हटाना
- लगभग 2 मिनट का कंटेंट रिप्लेस करना
फाइनल रनटाइम अब 131 मिनट 24 सेकंड तय किया गया है।
CBFC के व्यापक बदलाव संकेत देते हैं कि फिल्म की विषयवस्तु संवेदनशील श्रेणी में मानी गई है।
🚫 फिल्म पर रोक की मांग भी जारी
ट्रेलर सामने आने के बाद कुछ संगठनों और राजनीतिक समूहों ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई है। हालांकि सेंसर सर्टिफिकेट मिलने के बाद अब कानूनी प्रक्रिया और अदालत की समीक्षा अहम भूमिका निभाएगी।
भारत में विवादित फिल्मों के मामलों में अदालत की राय अक्सर अंतिम दिशा तय करती है।
🔎 आगे क्या?
अब सबकी नजर हाईकोर्ट स्क्रीनिंग पर है। अदालत की प्रतिक्रिया तय करेगी कि फिल्म बिना बाधा रिलीज होगी या आगे कोई कानूनी चुनौती सामने आएगी।