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टीम इंडिया को मिलेगा अलग कोचिंग स्टाफ, BCCI ने व्यस्त शेड्यूल के बीच बनाई नई रणनीति

भारतीय क्रिकेट टीम के लगातार व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम को देखते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने एक बार फिर स्प्लिट-कोचिंग मॉडल अपनाने का फैसला किया है। वेस्टइंडीज सीरीज, जिम्बाब्वे दौरे और एशियन गेम्स के कार्यक्रम एक-दूसरे से टकराने के कारण अलग-अलग टीमों के लिए अलग कोचिंग स्टाफ नियुक्त किया जाएगा। मुख्य कोच गौतम गंभीर सीनियर टीम के साथ रहेंगे, जबकि वीवीएस लक्ष्मण दूसरी भारतीय टीम की जिम्मेदारी संभालेंगे।

व्यस्त शेड्यूल के चलते अपनाया गया स्प्लिट-कोचिंग मॉडल

भारतीय क्रिकेट टीम के सामने आने वाले महीनों में लगातार अंतरराष्ट्रीय मुकाबले और मल्टी-स्पोर्ट्स इवेंट हैं। इसी वजह से बीसीसीआई ने एक बार फिर स्प्लिट-कोचिंग मॉडल लागू करने का निर्णय लिया है। वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू सीरीज के शुरुआती मुकाबले और एशियन गेम्स का कार्यक्रम लगभग एक ही समय पर होने के कारण एक ही कोचिंग स्टाफ दोनों टीमों के साथ नहीं रह सकता। ऐसे में बोर्ड ने अलग-अलग टीमों के लिए अलग कोचिंग व्यवस्था तैयार की है ताकि खिलाड़ियों की तैयारी और प्रदर्शन पर कोई असर न पड़े।

गौतम गंभीर सीनियर टीम के साथ, लक्ष्मण संभालेंगे दूसरी टीम

मुख्य कोच गौतम गंभीर भारत में होने वाली वेस्टइंडीज सीरीज के दौरान सीनियर टीम के साथ बने रहेंगे। वहीं, बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण जिम्बाब्वे दौरे और एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम के मुख्य कोच की भूमिका निभाएंगे। लक्ष्मण इससे पहले भी कई मौकों पर अंतरिम मुख्य कोच की जिम्मेदारी निभा चुके हैं और युवा खिलाड़ियों के साथ काम करने का उनका अनुभव बोर्ड के लिए बड़ी ताकत माना जाता है।

सुनील जोशी और ऋषिकेश कानिटकर निभाएंगे अहम जिम्मेदारी

वीवीएस लक्ष्मण के साथ अनुभवी सपोर्ट स्टाफ भी रहेगा। पूर्व भारतीय बल्लेबाज ऋषिकेश कानिटकर बल्लेबाजी कोच की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि पूर्व स्पिनर सुनील जोशी गेंदबाजी कोच के रूप में टीम के साथ जुड़ेंगे। यह कोचिंग ग्रुप जिम्बाब्वे दौरे और एशियन गेम्स दोनों में खिलाड़ियों के प्रदर्शन और तैयारी पर नजर रखेगा। बीसीसीआई का मानना है कि अनुभवी कोचों की मौजूदगी युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगी।

पहले भी कई बार अपनाया जा चुका है यह फॉर्मूला

बीसीसीआई के लिए स्प्लिट-कोचिंग कोई नया प्रयोग नहीं है। जब भी भारतीय टीम का कार्यक्रम अत्यधिक व्यस्त रहा है और दो अलग-अलग सीरीज या टूर्नामेंट एक साथ हुए हैं, तब बोर्ड ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के कोचों को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। वीवीएस लक्ष्मण भी पहले कई विदेशी दौरों पर मुख्य कोच की भूमिका निभा चुके हैं। इस मॉडल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर टीम को समान स्तर की कोचिंग और रणनीतिक सहयोग मिलता रहे।

बढ़ते अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के साथ बदली BCCI की रणनीति

भारतीय क्रिकेट का अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर लगातार व्यस्त होता जा रहा है। द्विपक्षीय सीरीज, आईसीसी टूर्नामेंट और मल्टी-स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओं के कारण खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ पर अतिरिक्त दबाव रहता है। ऐसे में बीसीसीआई अब लचीले कोचिंग ढांचे पर अधिक जोर दे रहा है। बोर्ड का मानना है कि अलग-अलग टीमों के लिए अलग कोचिंग स्टाफ तैयार करने से खिलाड़ियों के विकास, कार्यभार प्रबंधन और टीम की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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