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T20 वर्ल्ड कप बहिष्कार पर पाकिस्तान का यू-टर्न: 9 दिन में बदली रणनीति, ICC के दबाव में बैकफुट पर PCB

मैच बहिष्कार का ऐलान और सियासी संदेश

T20 विश्व कप में भारत के खिलाफ मुकाबला नहीं खेलने के पाकिस्तान के ऐलान ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हलचल मचा दी। यह घोषणा पाकिस्तान की संसद में की गई, जहां प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे “सोच-समझकर लिया गया फैसला” बताया। इस कदम को क्षेत्रीय राजनीति और कूटनीतिक दबाव की रणनीति के रूप में देखा गया।

बांग्लादेश के साथ एकजुटता का हवाला

पाकिस्तान ने अपने रुख को बांग्लादेश के समर्थन और क्षेत्रीय एकजुटता से जोड़ा। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम बदलते दक्षिण एशियाई समीकरणों और हालिया घटनाक्रमों के संदर्भ में उठाया गया था। कुछ ही दिनों में स्थिति बदली और इस निर्णय पर पुनर्विचार शुरू हो गया।

ICC की सख्ती और संभावित कार्रवाई

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने स्पष्ट संकेत दिए कि किसी भी निर्धारित मैच का बहिष्कार नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। सूत्रों के अनुसार, यदि पाकिस्तान मैच नहीं खेलता तो उस पर आर्थिक दंड, ICC टूर्नामेंट से प्रतिबंध या पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) के लिए विदेशी खिलाड़ियों को एनओसी में अड़चन जैसी कार्रवाई हो सकती थी। इसके बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) पर दबाव बढ़ गया।

आर्थिक पहलू बना बड़ा कारण

क्रिकेट विशेषज्ञों के मुताबिक भारत-पाकिस्तान मुकाबले की ब्रांड वैल्यू 200 मिलियन डॉलर से अधिक आंकी जाती है। ऐसे हाई-प्रोफाइल मैच से प्रसारण, स्पॉन्सरशिप और टिकटिंग के जरिए भारी राजस्व उत्पन्न होता है। सीमित आय वाले बोर्ड के लिए इस मैच को छोड़ना आर्थिक रूप से बड़ा जोखिम माना गया। यही वजह रही कि नौ दिनों के भीतर पाकिस्तान को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना पड़ा।

अन्य क्रिकेट बोर्डों का दबाव

श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद पाकिस्तान में खेली गई सीरीज की याद दिलाते हुए खेल भावना बनाए रखने की सलाह दी। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने भी ‘क्रिकेट इकोसिस्टम’ के हित में मैच खेलने का समर्थन किया। यूएई क्रिकेट बोर्ड ने संकेत दिया कि बहिष्कार से ICC और सहयोगी सदस्य देशों को आर्थिक नुकसान हो सकता है।

नरमी के संकेत और संभावित समझौता

सूत्रों के अनुसार, ICC ने स्थिति को संभालने के लिए कड़े कदमों के बजाय संवाद का रास्ता अपनाया। यह भी संकेत मिले कि भविष्य में भारत-पाकिस्तान मुकाबलों के लिए न्यूट्रल वेन्यू जैसे विकल्पों पर विचार हो सकता है। इससे दोनों पक्षों को संतुलित समाधान का अवसर मिल सकता है।

क्रिकेट इतिहास में बहिष्कार की मिसालें

क्रिकेट इतिहास में मैच बहिष्कार की घटनाएं नई नहीं हैं। 1996 विश्व कप में श्रीलंका को सुरक्षा कारणों से दो वॉकओवर मिले थे। 2003 विश्व कप में इंग्लैंड ने जिम्बाब्वे में खेलने से इनकार किया, जबकि न्यूजीलैंड ने केन्या के खिलाफ मैच नहीं खेला। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि खेल और राजनीति का संबंध समय-समय पर सामने आता रहा है।

खेल और कूटनीति के बीच संतुलन

पाकिस्तान का यह यू-टर्न दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट केवल खेल नहीं, बल्कि आर्थिक और कूटनीतिक हितों से भी जुड़ा है। हालांकि अंततः मैच खेलने की दिशा में बढ़ना ‘खेल भावना’ और वैश्विक क्रिकेट व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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