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मार्शल लॉ लगाने वाले साउथ कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति को 5 साल जेल की सजा


साउथ कोरिया के बदनाम पूर्व राष्ट्रपति यूं सुक येओल को मार्शल लॉ लगाने और न्याय में बाधा डालने के आरोप में पांच साल की जेल की सजा सुनाई गई है। यह फैसला उनके खिलाफ दायर कई मामलों में पहली सजा के रूप में आया है।


मार्शल लॉ का ऐतिहासिक निर्णय

यूं सुक येओल ने 3 दिसंबर, 2024 को साउथ कोरिया में नागरिक शासन को हटाकर मार्शल लॉ लागू किया था। इस कदम के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और संसद में हंगामा मच गया।


जेल की सजा और दोषारोपण

शुक्रवार, 16 जनवरी को सियोल के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज बाक डे-ह्यून ने कहा कि यूं ने जांचकर्ताओं को हिरासत में लेने से रोका और मार्शल लॉ लागू करने वाली बैठक से कैबिनेट सदस्यों को बाहर रखा, जिससे न्याय में बाधा उत्पन्न हुई।


जज का बयान: संविधान की अवहेलना

जज बाक ने कहा, “राष्ट्रपति के रूप में संविधान को बनाए रखने और कानून का पालन करना कर्तव्य है, लेकिन यूं सुक येओल ने ऐसा नहीं किया। उनका रवैया संविधान की अवहेलना करता है और दोष बेहद गंभीर है।”


आधिकारिक दस्तावेजों में जालसाजी का दोष नहीं

जज ने सबूतों के अभाव में यूं को आधिकारिक दस्तावेजों में जालसाजी करने का दोषी नहीं पाया। साथ ही, यूं के पास फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए सात दिन का समय है।


अभियोजकों की मांग और यूं का दावा

सरकारी वकीलों ने यूं के लिए 10 साल की जेल की मांग की थी। वहीं यूं ने जोर देकर कहा कि उन्होंने कोई कानून नहीं तोड़ा और उनकी कार्रवाई संवैधानिक और कानूनी दायरे में थी।


राजनीतिक और कानूनी प्रभाव

यह सजा साउथ कोरिया के राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण है। मार्शल लॉ लगाने का कदम और इसके बाद का विरोध न केवल राजनीतिक उथल-पुथल का कारण बना, बल्कि यह संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए न्यायिक प्रणाली की सक्रिय भूमिका को भी दर्शाता है।

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