40 हजार के लिए बेटे ने पिता की हत्या, 11 महीने तक बोला- ‘मुंबई गए हैं’, पुलिस ने खोला खौफनाक राज
मध्य प्रदेश के दतिया जिले में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला सनसनीखेज हत्याकांड सामने आया है। 40 हजार रुपये के विवाद में एक बेटे ने अपने पिता की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी, फिर शव को महीनों तक लोहे के बक्से में छिपाए रखा। करीब 11 महीने तक वह परिवार और ग्रामीणों को यह कहकर गुमराह करता रहा कि उसके पिता मुंबई मजदूरी करने गए हैं। वैज्ञानिक जांच और पुलिस पूछताछ के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।
40 हजार रुपये के विवाद ने ली पिता की जान
पुलिस के अनुसार, दतिया जिले के बड़ौनी थाना क्षेत्र के छता गांव निवासी उदयभान सिंह बुंदेला ने खेती और ट्रैक्टर की किस्त के लिए अपने बेटे नितिन को 40 हजार रुपये दिए थे। आरोप है कि नितिन ने यह पूरी रकम शराब और जुए में खर्च कर दी। जब पिता ने पैसे वापस मांगे तो दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। अगस्त 2025 की एक रात नितिन ने सो रहे पिता पर कुल्हाड़ी से कई वार कर उनकी हत्या कर दी और सबूत मिटाने की साजिश रच डाली।
शव छह महीने तक बक्से में रखा, फिर नदी में फेंक दिया
हत्या के बाद आरोपी ने शव को कथरी में लपेटकर घर में रखे लोहे के बक्से में बंद कर दिया और कमरे पर ताला लगा दिया। पुलिस के मुताबिक करीब छह महीने तक शव उसी बक्से में पड़ा रहा। जब शव कंकाल में बदल गया तो आरोपी ने अपने ताऊ कल्ली उर्फ अस्पेंद्र बुंदेला की मदद से अस्थियां, कपड़े और अन्य अवशेष सामली नदी के पास फेंक दिए। इस दौरान गांव वालों से लगातार कहा जाता रहा कि मृतक मुंबई मजदूरी करने गए हैं।
गुमशुदगी की शिकायत से खुला हत्या का राज
करीब 11 महीने बाद मृतक के बड़े भाई शिवराज सिंह ने अपने भाई की गुमशुदगी दर्ज कराते हुए भतीजे पर संदेह जताया। पुलिस ने नितिन से पूछताछ की तो उसने पहले ट्रैक्टर हादसे में मौत की झूठी कहानी सुनाई। लेकिन एफएसएल की वैज्ञानिक जांच में उसके दावे गलत साबित हुए। सख्ती से पूछताछ करने पर आरोपी ने हत्या की पूरी साजिश कबूल कर ली।
ताऊ से विवाद बना खुलासे की वजह
जांच में सामने आया कि कुछ समय बाद आरोपी और उसके ताऊ के बीच विवाद हो गया। गुस्से में ताऊ ने परिवार के सामने हत्या का पूरा सच बता दिया। इसके बाद पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने सामली नदी से मानव अस्थियां, कपड़े, कथरी और अन्य सबूत बरामद किए। घर से वह लोहे का बक्सा भी जब्त किया गया, जिसमें शव कई महीनों तक छिपाकर रखा गया था।
वैज्ञानिक जांच ने खोली साजिश की परतें
पुलिस का कहना है कि मामले का खुलासा वैज्ञानिक साक्ष्यों, एफएसएल रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले सबूत और आरोपियों की निशानदेही के आधार पर हुआ। पहले हादसे की कहानी गढ़कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की गई, लेकिन जांच में सच्चाई सामने आ गई। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।