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15वें दिन शुभम रेवाड़ के अनशन को बड़ा राजनीतिक मोड़, ICU पहुंचे अशोक गहलोत; आग्रह पर 48 घंटे बाद पिया पानी

राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव बहाली और राजस्थानी भाषा विभाग की मांग को लेकर 15 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता शुभम रेवाड़ से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में मुलाकात की। गहलोत के आग्रह पर शुभम रेवाड़ ने 48 घंटे बाद पानी पीने पर सहमति जताई। हालांकि, उनका आमरण अनशन और अन्य मांगों को लेकर आंदोलन अभी भी जारी है।

ICU पहुंचकर अशोक गहलोत ने जाना स्वास्थ्य का हाल

अनशन के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद शुभम रेवाड़ का इलाज जयपुर के एसएमएस अस्पताल में चल रहा है। बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, आदर्श नगर विधायक रफीक खान के साथ अस्पताल पहुंचे और आईसीयू में भर्ती छात्र नेता से मुलाकात की। उन्होंने चिकित्सकों से रेवाड़ की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। इस मुलाकात के दौरान गहलोत ने छात्र नेता से स्वास्थ्य का ध्यान रखने की अपील करते हुए आंदोलन जारी रखने के लिए जीवन को प्राथमिकता देने की बात कही।

गहलोत के आग्रह पर 48 घंटे बाद किया जल ग्रहण

समर्थकों के अनुसार, शुभम रेवाड़ ने पिछले 48 घंटे से पानी और चिकित्सकीय उपचार भी लेने से इनकार कर दिया था। अशोक गहलोत के समझाने और आग्रह के बाद उन्होंने पानी पीने की सहमति दी। इसके बाद गहलोत ने अपने हाथों से उन्हें पानी पिलाया। हालांकि, छात्र नेता ने स्पष्ट किया कि उनकी मूल मांगों को लेकर आमरण अनशन और सत्याग्रह जारी रहेगा। इस घटनाक्रम के बाद अस्पताल और छात्र समुदाय में मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली।

सरकार के रवैये पर गहलोत ने उठाए सवाल

अस्पताल पहुंचने से पहले और मुलाकात के बाद भी अशोक गहलोत ने राज्य सरकार के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ चुनाव की मांग कर रहे छात्रों के साथ संवाद स्थापित किया जाना चाहिए। गहलोत ने अपने बयान में आरोप लगाया कि सरकार ने अब तक आंदोलन समाप्त कराने या छात्रों की मांगों पर सकारात्मक पहल करने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की बात सुनना सरकार की जिम्मेदारी है। यह बयान पूर्व मुख्यमंत्री की राजनीतिक प्रतिक्रिया है।

छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा फिर बना राजनीतिक केंद्र

शुभम रेवाड़ का आंदोलन अब छात्र राजनीति से आगे बढ़कर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से अब तक इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया या वार्ता की घोषणा सार्वजनिक नहीं की गई है। छात्र संगठन अपनी मांगों पर कायम हैं और आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा सरकार और छात्रों के बीच संभावित बातचीत पर निर्भर करेगी।

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Stv News Rajasthan

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