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बनारस में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बयान: गौ रक्षा पर संत समाज को दो टूक संदेश

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने वाराणसी में गौ रक्षा को लेकर संत समाज से अपनी स्थिति स्पष्ट करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि संतों को यह तय करना होगा कि वे गौ रक्षा के पक्ष में खड़े हैं या गौ हत्या का समर्थन करने वालों के साथ। शंकराचार्य का यह बयान संत समाज के भीतर चल रही बहस के बीच सामने आया है।

“गाय को माता मानने वाला भाई, विरोध करने वाला कसाई”

एक साक्षात्कार में शंकराचार्य ने कहा कि गौ रक्षा के मुद्दे पर संत समाज को खुलकर अपनी राय रखनी चाहिए। उनके अनुसार, जो लोग गाय को माता मानते हैं, वे उनके लिए “भाई” हैं, जबकि जो गौ रक्षा का समर्थन नहीं करते, उन्हें उन्होंने “कसाई” की श्रेणी में रखा। उन्होंने कहा कि यह तय करने का अधिकार स्वयं संतों के पास है कि वे किस पक्ष में खड़े होना चाहते हैं।

गौ रक्षा समर्थक और विरोधी संतों की सूची लगाने की घोषणा

शंकराचार्य ने यह भी कहा कि वे एक बोर्ड लगाने जा रहे हैं, जिसमें गौ रक्षा के समर्थन में खड़े संतों के नाम एक कॉलम में और समर्थन न करने वालों के नाम दूसरे कॉलम में दर्ज किए जाएंगे। उनका कहना है कि इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन संत गौ रक्षा के साथ है और कौन नहीं।

संसाधनों की तुलना करते हुए “धर्म युद्ध” की बात

शंकराचार्य ने कहा कि सरकार के पास पर्याप्त संसाधन, व्यवस्था और शक्ति है, जबकि उनके पास केवल गौ माता का समर्थन है। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने पूर्वजों के आशीर्वाद और आस्था के साथ गौ रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

अखाड़ा परिषद ने शंकराचार्य के बयान पर जताई आपत्ति

शंकराचार्य के बयानों पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग अनुचित है और अखाड़ा परिषद इस तरह की भाषा का समर्थन नहीं करती।

अखाड़ा परिषद और प्रमोद कृष्णम ने यूपी सरकार का किया समर्थन

महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि अखाड़ा परिषद प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर भरोसा जताती है। वहीं, प्रमोद कृष्णम ने भी इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार के रुख का समर्थन किया है। दोनों नेताओं का कहना है कि संत समाज का बड़ा वर्ग

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