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सरला भट्ट हत्याकांड: 36 साल बाद नई चार्जशीट, परिजनों ने यासीन मलिक को फांसी की मांग की

कश्मीरी हिंदू नर्स सरला भट्ट हत्याकांड में 36 साल बाद दाखिल हुई नई चार्जशीट ने परिवार में न्याय की उम्मीद जगा दी है। जम्मू-कश्मीर पुलिस की SIA द्वारा दाखिल 700 से अधिक पन्नों की चार्जशीट में यासीन मलिक को मुख्य आरोपी बनाए जाने के बाद परिजनों ने उसे कड़ी से कड़ी सजा देने, यहां तक कि फांसी की मांग की है। परिवार का कहना है कि इतने वर्षों बाद भी उन्हें न्याय का इंतजार है।

36 साल बाद खुला पुराना केस, चार्जशीट से जगी उम्मीद

जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट प्रमुख यासीन मलिक के खिलाफ हाल ही में दाखिल की गई नई चार्जशीट ने 1990 के चर्चित सरला भट्ट अपहरण और हत्या मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने 700 से अधिक पन्नों की विस्तृत चार्जशीट पेश की है। इस कदम के बाद परिवार को उम्मीद है कि दशकों से लंबित न्याय प्रक्रिया अब आगे बढ़ेगी और दोषियों को सजा मिलेगी।

परिजनों का दर्द: ‘देर से मिला न्याय भी अन्याय जैसा’

सरला भट्ट के चचेरे भाई पीके भट्ट ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इतने वर्षों तक न्याय का इंतजार करना ही अपने आप में पीड़ा है। उन्होंने कहा कि “देर से मिला न्याय भी अन्याय के बराबर होता है।” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद न्याय मिलने की थोड़ी उम्मीद जरूर जगी है। परिवार का कहना है कि वे लंबे समय से इस मामले में न्याय की राह देख रहे थे।

यासीन मलिक पर सख्त कार्रवाई और फांसी की मांग

परिजनों ने साफ शब्दों में कहा है कि यासीन मलिक को किसी भी तरह की रियायत नहीं मिलनी चाहिए। पीके भट्ट ने उसे राजनीतिक कैदी बताए जाने की धारणा को खारिज करते हुए कहा कि वह एक हत्यारा है और उसे उसी रूप में देखा जाना चाहिए। परिवार ने मांग की है कि इस जघन्य अपराध के लिए उसे फांसी की सजा दी जाए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।

सरला भट्ट हत्याकांड की दर्दनाक यादें

सरला भट्ट कश्मीर के अनंतनाग जिले की रहने वाली थीं और श्रीनगर के SKIMS अस्पताल में नर्स के रूप में कार्यरत थीं। वर्ष 1990 में घाटी में हालात बिगड़ने के दौरान उनका अस्पताल के पास से अपहरण कर लिया गया था। बाद में उन्हें यातनाएं देने के बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। परिजनों के अनुसार, अंतिम संस्कार के दौरान भी उन्हें गंभीर उत्पीड़न और हिंसा का सामना करना पड़ा, जिससे परिवार को कश्मीर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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