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सरिस्का की ‘सच्ची रक्षक’: 157 किमी पैदल गश्त कर कोमल सैनी ने रचा साहस का नया इतिहास

राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां वनरक्षक कोमल सैनी ने मार्च 2026 में 157 किलोमीटर की पैदल गश्त पूरी कर कर्तव्यनिष्ठा और साहस का असाधारण उदाहरण पेश किया। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, जंगली जानवरों के खतरे और संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी। उनकी यह उपलब्धि न केवल वन विभाग के लिए गर्व का विषय है, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो चुनौतियों के बीच अपने कर्तव्य को निभाने का संकल्प रखता है।

157 किलोमीटर पैदल गश्त: संकल्प और साहस की मिसाल
मार्च 2026 में कोमल सैनी द्वारा पूरी की गई 157 किलोमीटर की पैदल गश्त सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उनके अटूट इरादों और मजबूत हौसले का प्रमाण है। यह गश्त घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और लगातार बदलते मौसम के बीच की गई, जहां हर कदम पर अनिश्चितता और खतरा मौजूद रहता है। बिना आधुनिक सुविधाओं के लंबे समय तक पैदल चलना शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। इसके बावजूद कोमल ने न केवल इस जिम्मेदारी को निभाया, बल्कि यह साबित किया कि समर्पण के सामने मुश्किलें छोटी पड़ जाती हैं।

खतरों के बीच ड्यूटी: हर दिन एक नई चुनौती

वनरक्षक का काम केवल गश्त करना नहीं, बल्कि वन्यजीवों और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। कोमल सैनी को अक्सर ऐसे क्षेत्रों में जाना पड़ता है जहां न मोबाइल नेटवर्क होता है और न ही किसी प्रकार की त्वरित सहायता उपलब्ध होती है। बाघ, तेंदुए और अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी हर पल जोखिम बढ़ाती है। इसके बावजूद वे हर दिन अपने कर्तव्य के प्रति पूरी निष्ठा के साथ निकलती हैं। उनके लिए ड्यूटी कोई विकल्प नहीं, बल्कि प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिसे वे हर परिस्थिति में निभाती हैं।

परिवार से दूरी, कर्तव्य से नजदीकी

कोमल सैनी का जीवन त्याग और समर्पण का उदाहरण है। त्योहारों, पारिवारिक अवसरों और व्यक्तिगत चुनौतियों के बावजूद उनकी प्राथमिकता हमेशा जंगल और उनकी जिम्मेदारी होती है। एक महिला वनरक्षक के रूप में उन्हें न केवल पेशेवर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक संतुलन भी बनाए रखना होता है। इसके बावजूद वे अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटतीं। उनका यह समर्पण उन्हें सामान्य से असाधारण बनाता है और समाज के लिए एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करता है।

वन्यजीव संरक्षण में अहम भूमिका: गश्त ही असली ढाल

वन्यजीव संरक्षण के लिए पैदल गश्त सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है। इसी के जरिए अवैध शिकार पर नजर रखी जाती है, जंगल की गतिविधियों को समझा जाता है और पर्यावरण संतुलन बनाए रखा जाता है। कोमल सैनी ने एम-स्ट्राइप्स पेट्रोलिंग के तहत जिस समर्पण से कार्य किया, उसने उन्हें विभाग में अलग पहचान दिलाई है। उनकी इस उपलब्धि को देखते हुए वन संरक्षक और क्षेत्रीय स्तर पर उन्हें सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है, जो उनके कार्य की महत्ता को दर्शाता है।

प्रेरणा की प्रतीक: हौसले के आगे नहीं टिकती बाधाएं


कोमल सैनी की कहानी यह संदेश देती है कि साहस और दृढ़ संकल्प किसी भी बाधा को पार कर सकते हैं। उन्होंने यह साबित किया कि जिम्मेदारी और जुनून के साथ काम किया जाए तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। आज सरिस्का के जंगलों में वे सिर्फ एक वनरक्षक नहीं, बल्कि एक सशक्त प्रेरणा बन चुकी हैं। उनका सफर हर उस व्यक्ति को आगे बढ़ने की ताकत देता है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटना चाहता।

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