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सरिस्का बाघ रेस्क्यू विवाद: 150 ग्रामीणों पर FIR से नाराजगी, निष्पक्ष जांच की मांग

सरिस्का बाघ विवाद: 150 ग्रामीणों की FIR पर बवाल

सरिस्का से सटे तुलसीवाला गांव में बाघ शावक के रेस्क्यू के दौरान हुए विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। वन विभाग की टीम पर हमले के मामले में करीब 150 ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज FIR के विरोध में ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर मुकदमे को गलत बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

150 ग्रामीणों पर FIR के विरोध में ग्रामीण पहुंचे SDM कार्यालय

कोटपूतली-बहरोड़ जिले के नारायणपुर उपखंड क्षेत्र के तुलसीवाला गांव में हुए बाघ रेस्क्यू विवाद को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। वन विभाग की शिकायत पर दर्ज मुकदमे के विरोध में शुक्रवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण उपखंड मुख्यालय पहुंचे। प्रशासक गणेश जाट और पूर्व सरपंच प्रतिनिधि मुकेश गुर्जर के नेतृत्व में ग्रामीणों ने SDM दिनेश शर्मा को जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग रखी।

बाघ शावक के रेस्क्यू के दौरान हुआ था विवाद

पूरा मामला 15 जुलाई का है, जब ग्राम पंचायत बामनवास कांकड़ के तुलसीवाला गांव में आबादी क्षेत्र के पास एक बाघ का शावक पहुंच गया था। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम रेस्क्यू के लिए मौके पर पहुंची। इसी दौरान भीड़ बढ़ने से स्थिति तनावपूर्ण हो गई और वन विभाग की टीम के साथ विवाद हो गया। विभाग का आरोप है कि रेस्क्यू अभियान के दौरान टीम पर हमला किया गया, जिसमें कई कर्मचारी घायल हुए।

ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाया लापरवाही का आरोप

ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बाघ के गांव में पहुंचने के बाद वन विभाग की टीम समय पर सक्रिय नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि रेस्क्यू में देरी के कारण मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए, जिससे हालात बिगड़ गए। ग्रामीणों ने दावा किया कि विभाग अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए निर्दोष लोगों को मामले में फंसा रहा है।

बच्चे की मौत की अफवाह से बिगड़ा माहौल

ग्रामीणों के अनुसार, रेस्क्यू के दौरान बाघ ने एक व्यक्ति पर हमला कर उसे घायल कर दिया था। इसके बाद गांव में अफवाह फैल गई कि बाघ ने एक बच्चे को नुकसान पहुंचाया है। इस खबर के बाद बच्चों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों में डर फैल गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों का कहना है कि इसी अफवाह के कारण भीड़ बढ़ी और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

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वन विभाग की टीम पर हमले में कई कर्मचारी हुए घायल

वन विभाग की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने इस मामले में छह लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। इनमें मोहरसिंह, नरसी, लीलाराम, दिलीप, किल्लू और खुशीराम गुर्जर के नाम शामिल हैं। इसके अलावा करीब 100 से 150 अन्य ग्रामीणों को भी आरोपी बनाया गया है। विभाग के अनुसार, हमले में तालवृक्ष रेंज के रेंजर त्रिलोक प्रजापत समेत सरिस्का टीम के कई कर्मचारी घायल हुए थे।

पहले भी मवेशियों पर हमला कर चुका है बाघ

ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि यह बाघ पहले भी क्षेत्र में सक्रिय रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, 29 जून को बाघ ने तुलसीवाला गांव में मवेशियों पर हमला किया था, जिसमें एक भैंस की मौत हो गई थी और तीन अन्य घायल हुई थीं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद वन विभाग ने बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए।

ग्रामीणों की मांग- FIR वापस हो और दोषियों पर कार्रवाई

ग्रामीणों ने मांग की है कि दर्ज मुकदमे की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि निर्दोष लोगों को आरोपी बनाया गया है तो उनके नाम हटाए जाएं। साथ ही ग्रामीणों ने वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की मांग भी की है। उनका कहना है कि बाघ की समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

SDM ने कलेक्टर को भेजा ज्ञापन

उपखंड अधिकारी दिनेश शर्मा ने बताया कि ग्रामीणों की ओर से ज्ञापन प्राप्त हुआ है। इसे आवश्यक कार्रवाई के लिए जिला कलेक्टर को भेज दिया गया है। अब मामले में प्रशासनिक स्तर पर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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