आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस का संदेश, आसियान मंच से जयशंकर ने टेरर फंडिंग पर जताई चिंता
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित 33वें आसियान रीजनल फोरम (ARF) में आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर सख्त और एकजुट कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के प्रति “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई जानी चाहिए और आतंकवादी संगठनों को मिलने वाली आर्थिक मदद तथा वित्तीय नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता पर जोर
मंत्री-स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने वालों के साथ-साथ उन्हें आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क पर भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि आतंकवाद की फंडिंग पर प्रभावी रोक लगाई जाए तो वैश्विक सुरक्षा को मजबूत करने में बड़ी सफलता मिल सकती है। उन्होंने सदस्य देशों से आतंकवाद के खिलाफ समन्वित और ठोस रणनीति अपनाने का आह्वान किया।
भारत निभा रहा सक्रिय भूमिका
जयशंकर ने कहा कि भारत और मलेशिया, आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM-Plus) के तहत आतंकवाद-रोधी एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप की सह-अध्यक्षता कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत आतंकवाद से निपटने के लिए सर्वोत्तम रणनीतियों और अनुभवों को साझा करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग ही इस चुनौती का प्रभावी समाधान है।
समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा पर भी जोर
विदेश मंत्री ने समुद्री सुरक्षा को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों पर किसी भी प्रकार का हमला स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार निर्बाध रूप से चलता रहे, इसके लिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने विशेष रूप से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षित और खुले समुद्री मार्ग बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
इंडो-पैसिफिक विजन और मानवीय सहायता का उल्लेख
अपने संबोधन में जयशंकर ने भारत की इंडो-पैसिफिक नीति और समुद्री सुरक्षा में बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना समुद्री डकैती, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा में लगातार योगदान दे रही है। इसके अलावा भारत ने श्रीलंका, फिलीपींस, म्यांमार और अफगानिस्तान जैसे देशों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता और बचाव दल भेजकर मानवीय सहयोग की अपनी प्रतिबद्धता भी निभाई है।
दक्षिण चीन सागर पर भारत का स्पष्ट रुख
डॉ. जयशंकर ने दक्षिण चीन सागर में नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन करते हुए कहा कि वहां एक प्रभावी और कानूनी रूप से बाध्यकारी आचार संहिता (Code of Conduct) लागू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS-1982) के अनुरूप होनी चाहिए, जिससे क्षेत्र में शांति, स्थिरता और निर्बाध समुद्री आवागमन सुनिश्चित किया जा सके।