रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन की जंग तेज, मॉस्को पर 419 ड्रोन हमलों का दावा; दोनों देशों में तबाही
रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन हमले लगातार तेज होते जा रहे हैं। रूस का दावा है कि उसने एक ही रात में सैकड़ों यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए, जबकि मॉस्को क्षेत्र में ड्रोन का मलबा गिरने से एक शिशु की मौत हो गई। दूसरी ओर, यूक्रेन में रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों में भी कई लोगों के मारे जाने की खबर है।
रूस का दावा- 419 यूक्रेनी ड्रोन किए नष्ट
रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने रातभर में 419 यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराया। मंत्रालय के अनुसार, ये ड्रोन देश के विभिन्न हिस्सों की ओर बढ़ रहे थे और एयर डिफेंस सिस्टम ने उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट कर दिया। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने भी राजधानी की ओर बढ़ रहे कई ड्रोन को निष्क्रिय किए जाने की जानकारी दी।
मॉस्को क्षेत्र में मलबा गिरने से शिशु की मौत
मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव के मुताबिक, ड्रोन का मलबा एक रिहायशी इमारत पर गिरा, जिससे छह महीने के एक बच्चे की मौत हो गई। हादसे के बाद बचाव दल ने अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला और घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
ड्रोन हमले बने युद्ध की नई रणनीति
रूस का कहना है कि हाल के महीनों में यह सबसे बड़े ड्रोन हमलों में से एक है। इससे पहले भी उसने सैकड़ों यूक्रेनी ड्रोन मार गिराने का दावा किया था। दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष में अब ड्रोन लंबी दूरी तक हमले करने का प्रमुख हथियार बन चुके हैं।
जेलेंस्की ने रूस की रणनीति पर उठाए सवाल
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि रूस लगातार डोनबास क्षेत्र पर कब्जे के लिए समय-सीमा तय करता रहा है, लेकिन अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया। उन्होंने दावा किया कि यूक्रेन के जवाबी हमलों से रूस की सैन्य और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है।
यूक्रेन में भी रूसी हमलों से भारी नुकसान
दूसरी ओर, यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार रूस ने कई शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। द्निप्रो में मिसाइल हमले में कई लोगों की मौत और दर्जनों घायल हुए, जबकि जापोरिज्जिया में एक मिनीबस पर ड्रोन हमले की भी सूचना है। इन हमलों में नागरिकों के हताहत होने की खबरें सामने आई हैं।
युद्ध में बढ़ता जा रहा ड्रोन का इस्तेमाल
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और यूक्रेन दोनों अब पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ ड्रोन तकनीक पर अधिक निर्भर हो रहे हैं। कम लागत, लंबी दूरी और सटीक निशाने की क्षमता के कारण ड्रोन इस युद्ध का सबसे प्रभावी हथियार बनकर उभरे हैं।