रूस का ट्रंप को दोटूक संदेश: हथियारों से नहीं थमेगा युद्ध, यूक्रेन को मदद से बढ़ेगा संघर्ष
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। यूक्रेन को अमेरिकी सैन्य सहायता और रूसी क्षेत्रों पर बढ़ते हमलों के बीच क्रेमलिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को स्पष्ट संदेश दिया है। रूस का कहना है कि हथियारों की आपूर्ति और सैन्य दबाव से शांति नहीं आएगी, बल्कि युद्ध और लंबा चलेगा। साथ ही मॉस्को ने संकेत दिए हैं कि वह अपनी सुरक्षा रणनीति को और आक्रामक बना सकता है।
क्रेमलिन ने अमेरिका की रणनीति पर उठाए सवाल
रूस ने अमेरिका की उस सोच को खारिज कर दिया है कि यूक्रेन की सैन्य क्षमता बढ़ाने से युद्ध समाप्त करने का रास्ता आसान होगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि सैन्य दबाव शांति का समाधान नहीं है। उनके अनुसार, यदि यूक्रेन रूस के भीतर हमले जारी रखता है तो संघर्ष और अधिक लंबा चलेगा। रूस ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
‘व्हाइट हाउस स्थिति को सही नहीं समझ रहा’
दिमित्री पेसकोव ने कहा कि अमेरिका की रणनीति वास्तविक परिस्थितियों को सही ढंग से नहीं समझ रही है। उनका कहना है कि व्हाइट हाउस यह मानकर चल रहा है कि सैन्य कार्रवाई बढ़ाने से बातचीत आसान होगी, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। रूस का दावा है कि इस तरह के कदम तनाव कम करने के बजाय दोनों देशों के बीच टकराव को और गहरा करेंगे।
पुतिन फिलहाल समझौते के मूड में नहीं
रूसी मीडिया और क्रेमलिन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन फिलहाल किसी जल्दबाजी में शांति समझौते के पक्ष में नहीं हैं। हाल के दिनों में यूक्रेन द्वारा रूसी तेल प्रतिष्ठानों और अन्य रणनीतिक ठिकानों पर किए गए ड्रोन हमलों के बाद रूस की सुरक्षा नीति और अधिक सख्त होती दिखाई दे रही है। सूत्रों का मानना है कि आने वाले महीनों में रूस अपनी सैन्य कार्रवाई और तेज कर सकता है।
अमेरिकी हथियारों की आपूर्ति पर रूस की प्रतिक्रिया
यूक्रेन को अमेरिका की ओर से हथियार और एयर डिफेंस सिस्टम उपलब्ध कराने पर भी रूस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पेसकोव ने कहा कि मॉस्को को पूरी जानकारी है कि अमेरिका लगातार यूक्रेन को सैन्य सहायता दे रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की मदद से युद्ध समाप्त होने की संभावना कम होगी और दोनों पक्षों के बीच सैन्य टकराव और बढ़ सकता है।
नाटो और ट्रंप के बयानों पर भी दिया जवाब
हाल ही में नाटो सम्मेलन के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन की सैन्य कार्रवाइयों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए थे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पेसकोव ने कहा कि रूस इन बयानों से सहमत नहीं है। उनके मुताबिक, किसी भी प्रकार का सैन्य विस्तार शांति प्रक्रिया को आसान नहीं बनाएगा, बल्कि रूस को अपनी सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करनी पड़ेगी।
मध्य पूर्व के बाद फिर शुरू हो सकती है कूटनीतिक पहल
क्रेमलिन ने यह भी संकेत दिया कि यदि मध्य पूर्व की परिस्थितियां सामान्य होती हैं तो अमेरिका दोबारा रूस-यूक्रेन शांति वार्ता में सक्रिय भूमिका निभा सकता है। रूस ने उम्मीद जताई कि भविष्य में कूटनीतिक प्रयासों के जरिए समाधान तलाशने की कोशिशें फिर तेज हो सकती हैं, हालांकि मौजूदा हालात में सैन्य तनाव कम होता नहीं दिख रहा।