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RPSC रिजर्व लिस्ट में नाम होने से नौकरी का हक नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा हाईकोर्ट का आदेश


सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) को बड़ी राहत देते हुए कहा कि रिजर्व या वेटिंग लिस्ट में नाम होना सीधे नियुक्ति का अधिकार नहीं देता। इस फैसले से भर्ती प्रक्रियाओं में नियमों की पालना और आयोग की स्वतंत्रता दोनों को मजबूती मिली है।


1. क्या था मामला?

फैसला कनिष्ठ विधि अधिकारी भर्ती 2013 और 2019 और सहायक सांख्यिकी अधिकारी भर्ती 2020 से जुड़ा है। मुख्य लिस्ट के कुछ चयनित उम्मीदवारों ने नौकरी जॉइन नहीं की, जिसके बाद रिजर्व लिस्ट के उम्मीदवारों ने रिक्त पदों पर दावा किया। यति जैन, आकृति सक्सेना और विवेक कुमार मीणा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

इस विवाद ने भर्ती प्रक्रिया में रिजर्व लिस्ट की वैधता और नियमों के महत्व को सामने लाया।


2. हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने पलटा

हाईकोर्ट की सिंगल बेंच और डिवीजन बेंच ने रिजर्व लिस्ट उम्मीदवारों के पक्ष में नियुक्ति आदेश दिए थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की बेंच—न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह—ने हाईकोर्ट के आदेशों को पलट दिया।

यह फैसला नियमों और भर्ती प्रक्रियाओं की सख्ती को लेकर एक मिसाल बन गया।


3. नियमों की सख्ती पर जोर

कोर्ट ने कहा कि राजस्थान सेवा नियमों के मुताबिक रिजर्व लिस्ट मुख्य लिस्ट जारी होने की तारीख से केवल छह महीने तक वैध रहती है। उसके बाद लिस्ट समाप्त हो जाती है। केवल लिस्ट में नाम होने से किसी उम्मीदवार को कानूनी हक नहीं मिलता।

यह स्पष्ट करता है कि भर्ती प्रक्रिया में समयसीमा और नियमों का पालन अनिवार्य है।


4. RPSC की स्वतंत्रता और आयोग की स्वायत्तता

सुप्रीम कोर्ट ने RPSC को स्वतंत्र संवैधानिक संस्था बताया। राज्य सरकार अपील न करे, तब भी आयोग को नियमों की रक्षा के लिए कोर्ट जाने का अधिकार है। इससे आयोग की स्वायत्तता और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत हुई।

आयोग की स्वायत्तता सुनिश्चित करने से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहती है।


5. समयसीमा का महत्व और भर्ती की शुचिता

कोर्ट ने चेताया कि चयन प्रक्रिया को अनिश्चित समय तक खींचना नई भर्तियों के उम्मीदवारों के अवसरों को प्रभावित कर सकता है। उम्मीदवारों के प्रति सहानुभूति जताने के बावजूद कोर्ट ने कहा कि नियम और समय सीमा के खिलाफ आदेश नहीं दिए जा सकते।

यह फैसला भर्ती की शुचिता और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

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