प्याज के बढ़े दामों से अलवर के किसानों में लौटी रौनक, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को जताया आभार
लाल सोना कही जाने वाली अलवर की प्याज इस बार किसानों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही थी। लागत से भी कम दाम मिलने के कारण किसान गंभीर आर्थिक संकट और मायूसी से जूझ रहे थे। एक बीघा में प्याज तैयार करने में करीब 50 से 60 हजार रुपये का खर्च आता है, लेकिन बाजार में मिले बेहद कम भाव के चलते किसान अपनी लागत का आधा हिस्सा भी नहीं निकाल पा रहे थे। हालात ऐसे थे कि कई किसान कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे थे।
किसानों की इस पीड़ा को देखते हुए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद भारत सरकार ने प्याज के निर्यात पर लगी रोक हटाने का निर्णय लिया। निर्यात खुलते ही प्याज के दामों में तेजी आई और किसान फिर से राहत की सांस लेते नजर आए।
प्याज के भाव बढ़ने से किसानों के चेहरों पर लंबे समय बाद मुस्कान लौटी है। अलवर के किसानों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के प्रति आभार जताते हुए कहा कि वे अलवर के विकास के लिए हमेशा सक्रिय रहते हैं और अब प्याज निर्यात शुरू करवाकर उन्होंने किसानों को बड़ी आर्थिक मदद दी है। किसानों का कहना है कि अब उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे खेतों में फिर से उम्मीदों की हरियाली लौट आई है।