लालकिला धमाका: 12 की मौत पर कांग्रेस में बयानबाजी, कर्नाटक मंत्री बोले- राजनीतिक साजिश की बू, डीके शिवकुमार ने दिया सफाई बयान..
दिल्ली के लालकिला के पास हुए भीषण धमाके में अब तक हुई 13 लोगों की मौत के बाद देशभर में राजनीतिक हलचल मच गई है। जहां सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी हैं, वहीं कांग्रेस के भीतर से इस मामले को लेकर अलग-अलग सुर सामने आने लगे हैं। कर्नाटक के एक मंत्री और दूसरे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने इसे ‘राजनीतिक साजिश’ बताया है, जबकि उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने पार्टी लाइन को स्पष्ट करते हुए बयान को संभालने की कोशिश की है।
धमाके से दहली दिल्ली, 12 लोगों की मौत
दिल्ली के लालकिला के पास हुए इस विस्फोट ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। धमाके में अब तक 13 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई घायल अस्पतालों में भर्ती हैं। घटना के बाद दिल्ली पुलिस, एनआईए और फॉरेंसिक टीमें मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई हैं। शुरुआती जांच में विस्फोटकों के स्रोत और संभावित साजिश के एंगल की जांच की जा रही है।
कांग्रेस नेताओं ने जताया ‘राजनीतिक साजिश’ का शक
धमाके के बाद कर्नाटक सरकार के एक मंत्री और एक अन्य कांग्रेसी नेता ने इसे राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया है। नेताओं का कहना है कि यह विस्फोट किसी “चुनावी एजेंडे” का हिस्सा हो सकता है। दोनों ने इसे सीधे तौर पर बिहार चुनाव से जोड़ते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं जनता का ध्यान भटकाने के लिए कराई जाती हैं। हालांकि उनके इस बयान से राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है।
डी.के. शिवकुमार ने संभाली स्थिति
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने अपने सहयोगियों के बयानों को ‘व्यक्तिगत राय’ बताते हुए कहा कि पार्टी जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर भरोसा करती है। शिवकुमार ने कहा, “हम किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकते जब तक जांच पूरी नहीं होती। आतंकवाद या हिंसा पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।” उनके इस बयान को कांग्रेस के आधिकारिक रुख के रूप में देखा जा रहा है।
विपक्ष ने कांग्रेस पर साधा निशाना
विपक्षी दलों ने कांग्रेस नेताओं के बयानों की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील वक्त में राजनीति करना “गैरजिम्मेदाराना रवैया” है। भाजपा नेताओं ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से जांच करने दी जानी चाहिए और किसी को भी राजनीतिक लाभ के लिए घटना का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।
लालकिला धमाका न केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है, बल्कि इसने राजनीतिक दलों को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।