रामगढ़ में खनन माफिया बेलगाम: 100 फीट गहरे मौत के गड्ढे में समाया ऑपरेटर, चौथे दिन भी रेस्क्यू नाकाम…
अलवर जिले के रामगढ़ क्षेत्र स्थित ओडेला खनन क्षेत्र की लीज एक बार फिर सवालों के घेरे में है। खनन लीज पर हुई दर्दनाक दुर्घटना के चौथे दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है, लेकिन अब तक पोकलेन मशीन ऑपरेटर रामानंद तिवारी का कोई सुराग नहीं लग पाया है।
गाजियाबाद और अलवर से मंगाई गई भारी-भरकम क्रेनों के साथ सर्च ऑपरेशन चल रहा है। अजमेर से पहुंची एनडीआरएफ की टीम, पहले से जुटी एसडीआरएफ के साथ मिलकर करीब 100 फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे में तलाश कर रही है, जहां मशीन सहित ऑपरेटर के गिरने की आशंका है।
घटनास्थल पर अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव सफिया जुबेर खान पहुंचीं। उनके साथ भारी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे। सफिया जुबेर खान ने मौके पर डीएसपी पिंटू कुमार, तहसीलदार और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से घटना की विस्तृत जानकारी ली और अवैध खनन पर गंभीर सवाल खड़े किए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि लीज की आड़ में रामगढ़ क्षेत्र में किसके संरक्षण में अवैध खनन चल रहा है?
ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफिया नियमों को ताक पर रखकर पाताल तोड़ खनन कर रहे हैं। हालत यह है कि जमीन से पानी निकलने लगा है और अधिकांश खदानें 80 से 100 फीट गहरे पानी से भरे मौत के गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं।
इन खतरनाक गड्ढों में आए दिन हादसे हो रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक अनदेखी ने खनन माफियाओं के हौसले बुलंद कर रखे हैं। सवाल यह भी है कि जब खनन नियम स्पष्ट हैं, तो फिर इतनी गहराई तक खनन कैसे हुआ? क्या किसी की आंखें जानबूझकर बंद रखी गईं?
फिलहाल, मृतक के परिजन चार दिन से शव निकलने का इंतजार कर रहे हैं, उम्मीद और टूटते सब्र के बीच। वहीं, प्रशासन रेस्क्यू जारी होने की बात कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता नजर आ रहा है।
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और खनन माफिया की मनमानी का जीता-जागता सबूत बनता जा रहा है।