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रामगढ़ कॉलेज की जमीन अतिक्रमण मुक्त, पांच साल पुराने कब्जे पर चला प्रशासन का बुलडोजर

अलवर जिले के रामगढ़ कस्बे में राजकीय महाविद्यालय के लिए आवंटित भूमि को आखिरकार अतिक्रमण मुक्त करा लिया गया। लंबे समय से विवादित चल रही इस सरकारी जमीन पर प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया। न्यायालय और प्रशासनिक स्तर पर सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद की गई इस कार्रवाई से अब कॉलेज भवन निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।

कॉलेज भूमि पर चला संयुक्त अभियान

शुक्रवार को रामगढ़ के गोविंदगढ़ मोड़ स्थित राजकीय महाविद्यालय के लिए निर्धारित भूमि पर प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। तहसीलदार अंकित गुप्ता के नेतृत्व में राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए जेसीबी मशीनों की मदद से अवैध निर्माणों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। प्रशासन का उद्देश्य सरकारी भूमि को मुक्त कर शिक्षा संबंधी विकास कार्यों को आगे बढ़ाना था।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए

कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई। अलवर पुलिस लाइन सहित विभिन्न थानों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। मौके पर फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस और विद्युत विभाग की टीमें भी तैनात रहीं। एहतियात के तौर पर आसपास की बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कर दी गई। प्रशासन ने पूरी कार्रवाई को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया और कानून-व्यवस्था पर विशेष ध्यान रखा।

पांच वर्षों से था भूमि पर कब्जा

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार कॉलेज निर्माण के लिए आवंटित भूमि पर एक परिवार पिछले लगभग पांच वर्षों से कब्जा किए हुए था। कार्रवाई से पहले प्रशासन ने संबंधित परिवार को समझाइश दी, जिसके बाद उन्होंने स्वेच्छा से मकान खाली कर अपना सामान बाहर निकाल लिया। इसके बाद जेसीबी मशीनों की सहायता से निर्माण हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रशासन का कहना है कि सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन करते हुए कार्रवाई की गई है।

अदालत में चुनौती भी नहीं आई काम

तहसीलदार अंकित गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2021 में आठ बीघा शिवायचक भूमि राजकीय महाविद्यालय भवन निर्माण के लिए आवंटित की गई थी। भूमि आवंटन के खिलाफ दयाचंद पुत्र भूरासिंह सैनी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि मार्च 2026 में उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी। इसके बाद संभागीय आयुक्त के समक्ष दायर अपील भी निरस्त कर दी गई और जिला प्रशासन के निर्णय को सही ठहराया गया। सभी कानूनी विकल्प समाप्त होने के बाद प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अमल में लाई।

कॉलेज निर्माण का रास्ता हुआ साफ

भूमि अतिक्रमण मुक्त होने के बाद अब राजकीय महाविद्यालय भवन निर्माण की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है। क्षेत्र के विद्यार्थियों को लंबे समय से बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं का इंतजार था। प्रशासन का मानना है कि कॉलेज भवन बनने से स्थानीय छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध होंगे। वहीं ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने भी कार्रवाई का स्वागत करते हुए जल्द निर्माण कार्य शुरू करने की मांग की है।

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