राम मंदिर ट्रस्ट में बदलाव पर तेज हुई बहस, VHP ने फैसले का किया समर्थन; कांग्रेस ने उठाए सवाल
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए प्रशासनिक बदलाव के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार करते हुए पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने का निर्णय लिया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इस कदम का समर्थन किया है, जबकि कांग्रेस ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
ट्रस्ट ने प्रशासनिक ढांचे में किए अहम बदलाव
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की हालिया बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए गए। साथ ही ट्रस्ट ने पहली बार एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने का फैसला लिया। इसके लिए तीन सदस्यीय चयन समिति का गठन किया गया है। जब तक नियमित नियुक्ति नहीं होती, तब तक कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ट्रस्ट का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित तथा पारदर्शी बनाना बताया गया है।
VHP ने फैसले को बताया सकारात्मक कदम
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने ट्रस्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि बैठक रचनात्मक रही और भविष्य की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। उन्होंने कहा कि इतने बड़े धार्मिक और सामाजिक प्रोजेक्ट को केवल आपसी विश्वास के आधार पर नहीं चलाया जा सकता, इसलिए पेशेवर प्रशासनिक व्यवस्था जरूरी है। उनके अनुसार, CEO की नियुक्ति से जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों बढ़ेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट भविष्य में वित्तीय प्रबंधन को और मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा और निगरानी उपाय लागू करेगा।
कांग्रेस ने ट्रस्ट और सरकार पर साधा निशाना
दूसरी ओर कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि यदि चढ़ावे और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोप सामने आए हैं, तो लोगों का भरोसा कायम रखने के लिए व्यापक कदम उठाने चाहिए। उन्होंने ट्रस्ट को भंग करने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए। इससे पहले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा भी इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग चुके हैं।
विवाद के बीच पारदर्शिता पर बढ़ा जोर
राम मंदिर ट्रस्ट में हुए बदलावों ने एक बार फिर धार्मिक संस्थाओं के प्रशासन और वित्तीय पारदर्शिता पर चर्चा तेज कर दी है। जहां VHP इसे संस्थागत सुधार की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसकी निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग कर रहा है। फिलहाल ट्रस्ट की ओर से CEO नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आने वाले दिनों में इस नियुक्ति और प्रशासनिक सुधारों पर सभी की नजर रहेगी।