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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: टीएमसी ने बीजेपी को घेरा, कहा- ‘भगवान के नाम पर आस्था से किया धोखा’

अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले ने अब राष्ट्रीय राजनीति में तूल पकड़ लिया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखा हमला बोला है, जिसमें उन्होंने भगवान राम के नाम पर आस्था के साथ धोखा करने का आरोप लगाया है। वहीं, दूसरी ओर अयोध्या पुलिस ने मामले की जांच तेज करते हुए सभी आठ आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की है और सोमवार को उनकी न्यायिक हिरासत रिमांड की अपील कर सकती है।

टीएमसी का हमला: बीजेपी की नैतिक साख पर उठाए सवाल

टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि राम मंदिर के इर्द-गिर्द हो रही घटनाएं बेहद चौंकाने वाली हैं। उन्होंने कहा कि दशकों से यह मंदिर बीजेपी और आरएसएस की हिंदुत्व राजनीति का मुख्य आधार रहा है, लेकिन आज उसी पर भ्रष्टाचार और चोरी के गंभीर आरोप लग रहे हैं। घोष ने दावा किया कि जिस आंदोलन ने आस्था की रक्षा का वादा किया था, उसने ही भगवान राम के नाम का दुरुपयोग करके जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, जिससे पार्टी की नैतिक और राजनीतिक साख पूरी तरह टूट चुकी है।

आरोपियों के ठिकानों पर पुलिस की व्यापक छापेमारी

मामले की गहनता से जांच के लिए अयोध्या पुलिस ने रविवार को एक साथ सभी आठ आरोपियों के घरों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई में लव कुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला और रामाशंकर यादव समेत अन्य आरोपियों के ठिकानों की तलाशी ली गई। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने आरोपी मनीष यादव के घर से आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खातों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। ये दस्तावेज चढ़ावे की नकदी और कीमती वस्तुओं के कथित गबन में वित्तीय लेनदेन और हेराफेरी के सबूत जुटाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

आज कोर्ट में पेशी: पुलिस मांग सकती है रिमांड

अयोध्या की स्थानीय अदालत ने दो दिन पहले ही इस मामले में शामिल सभी आठ आरोपियों को 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। सोमवार को होने वाली सुनवाई के दौरान पुलिस इन आरोपियों की पुलिस रिमांड की मांग कर सकती है ताकि उनसे पूछताछ करके चोरी की पूरी साजिश और नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। बता दें कि गिरफ्तार किए गए अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, करुणेश पांडे, सुभाष श्रीवास्तव सहित अन्य आरोपियों की जिम्मेदारी मंदिर में मिलने वाले दान और कीमती सामग्रियों की गिनती एवं व्यवस्था से संबंधित थी।

सवाल: क्या आस्था की राजनीति अब संकट में?

यह मामला केवल एक प्रशासनिक चोरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है। विपक्षी दलों का मानना है कि यदि मंदिर प्रबंधन में ही इतनी बड़ी खामी है, तो आम श्रद्धालुओं का विश्वास कैसे बना रहेगा? वहीं, सत्ता पक्ष का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और इसे राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। फिलहाल, देश भर की निगाहें अयोध्या कोर्ट के फैसले और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या इस पवित्र स्थल की गरिमा को पुनः स्थापित किया जा सकेगा।

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