अलवर में गो सम्मान दिवस पर रैली, गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की उठी मांग
अलवर में सोमवार को देशभर में मनाए जा रहे गो सम्मान दिवस के अवसर पर गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने रैली निकाली। इस दौरान विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, गोभक्तों, गौसेवकों, गौशालाओं से जुड़े कार्यकर्ताओं और संत समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
सुबह करीब 10 बजे भवानी तोप चौराहे से मिनी सचिवालय तक निकाली गई इस रैली में सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां लेकर गो माता के संरक्षण और सम्मान की मांग करते नजर आए। रैली के माध्यम से जिला प्रशासन को राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
मिनी सचिवालय गेट पर बैरिकेडिंग होने के कारण प्रदर्शनकारियों को अंदर प्रवेश नहीं दिया गया, जिस पर कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। बाद में प्रशासन की अनुमति से 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को अंदर भेजा गया, जिन्होंने एडीएम योगेश डागुर को ज्ञापन सौंपा।
इस दौरान आरएसएस के विभाग संघ चालक डॉ. के.के. गुप्ता, पूर्व सभापति अजय अग्रवाल, विश्व हिंदू परिषद के जिला मंत्री विजेंद्र खंडेलवाल, बजरंग दल के प्रेम गुप्ता और प्रेम सिंह राजावत सहित ओम प्रकाश गुप्ता, अंजना दीवान और सुनील जैन मौजूद रहे।
पूर्व सभापति अजय अग्रवाल ने कहा कि गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिया जाना चाहिए और प्रत्येक प्रदेश में गो अभ्यारण्य एवं नंदी शालाएं स्थापित की जानी चाहिए, ताकि गायों का संरक्षण और सम्मान सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में गौशालाओं को मिलने वाला अनुदान एक समान होना चाहिए।
वहीं डॉ. के.के. गुप्ता ने कहा कि गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने के साथ-साथ गौतस्करी और गोकशी पर सख्ती से रोक लगाना आवश्यक है, क्योंकि यह करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है।
पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने कहा कि जिला प्रशासन के माध्यम से देश के शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों को ज्ञापन भेजकर गाय के संरक्षण और राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग की गई है।
प्रदर्शन के दौरान अंजना दीवान और प्रेम गुप्ता सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने भी अपनी मांगों को दोहराया।
हालांकि, प्रतिनिधिमंडल के अंदर जाने को लेकर कुछ प्रदर्शनकारियों में नाराजगी भी देखने को मिली। उनका कहना था कि वे सुबह 8 बजे से धूप में खड़े होकर प्रदर्शन कर रहे थे, ऐसे में प्रशासन को ज्ञापन लेने के लिए बाहर आना चाहिए था। प्रतिनिधिमंडल के बाहर आने पर उन्हें कुछ लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ा।