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राजस्थान में पोषाहार विवाद पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने घेरा भजनलाल सरकार को

राजस्थान के आंगनबाड़ी केंद्रों में वितरित पोषाहार की गुणवत्ता को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भाजपा विधायक के बयान के बाद कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष ने बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग उठाई है।

भाजपा विधायक के बयान से मचा राजनीतिक तूफान

उदयपुर में आयोजित संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान भाजपा विधायक Pratap Gameti ने आंगनबाड़ी केंद्रों में मिलने वाले पोषाहार की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पोषाहार की स्थिति इतनी खराब है कि “जानवर भी इसे नहीं खाते।” यह बयान सामने आते ही प्रदेश की राजनीति गरमा गई। खास बात यह रही कि यह टिप्पणी डिप्टी सीएम Diya Kumari की मौजूदगी में की गई, जिससे विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का बड़ा मौका मिल गया।

कांग्रेस ने सरकार पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

Govind Singh Dotasra ने सरकार पर बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पोषण बजट में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर घटिया पोषाहार की सप्लाई कौन कर रहा है और इसके पीछे किसकी मिलीभगत है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि पोषाहार की गुणवत्ता इतनी खराब है, तो यह सीधे तौर पर मासूम बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। विपक्ष ने इसे “भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी” का मामला बताते हुए पारदर्शी जांच की मांग की है।

Ashok Gehlot ने उठाए सरकार की कार्यशैली पर सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जब सत्ताधारी दल के विधायक ही सरकारी योजनाओं की पोल खोल रहे हैं, तो स्थिति बेहद गंभीर है। गहलोत ने विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई और पूछा कि क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह मुद्दा भी दबा दिया जाएगा।

Tika Ram Jully बोले—‘प्रदेश में अव्यवस्था का तमाशा’

नेता प्रतिपक्ष Tika Ram Jully ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में विकास नहीं, बल्कि अव्यवस्था का माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि पोषण आहार की गुणवत्ता इतनी खराब हो चुकी है कि अब खुद भाजपा के विधायक भी सवाल उठाने लगे हैं। जूली ने कहा कि सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर योजनाओं की हालत बेहद खराब है।

सरकार पर बढ़ा दबाव, जांच की मांग तेज

विपक्षी दलों के हमलों के बाद अब सरकार पर जवाब देने का दबाव बढ़ गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार की गुणवत्ता को लेकर प्रदेशभर में चर्चा तेज हो गई है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा और राजनीतिक मंचों पर और अधिक गर्मा सकता है।

निष्कर्ष

आंगनबाड़ी पोषाहार विवाद ने राजस्थान की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और क्या वास्तव में पोषाहार व्यवस्था में सुधार के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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