राजस्थान स्कूल रैंकिंग में सीकर अव्वल, ब्यावर सबसे पीछे; बूंदी 9वें स्थान पर
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर अगस्त महीने की जिला स्तरीय रैंकिंग जारी हुई है। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से जारी इस रैंकिंग में शेखावाटी के जिलों ने एक बार फिर बेहतर प्रदर्शन किया है। 41 जिलों की सूची में सीकर ने 78 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया। झुंझुनूं 75 अंकों के साथ दूसरे और हनुमानगढ़ भी 75 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। वहीं बूंदी 64 अंक लेकर नौवें पायदान पर रहा। ब्यावर 44 अंकों के साथ रैंकिंग में सबसे नीचे रहा।
सीकर ने हासिल किया पहला स्थान
अगस्त की जिला रैंकिंग में सीकर का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। जिले ने कुल 78 अंक हासिल किए। झुंझुनूं 75 अंकों के साथ दूसरे और हनुमानगढ़ 75 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।चूरू को 67 अंक मिले और वह चौथे स्थान पर रहा। पाली और डीडवाना-कुचामन ने 66-66 अंक हासिल किए। दोनों जिले क्रमश: पांचवें और छठे स्थान पर रहे। इस तरह शीर्ष स्थानों पर शेखावाटी और अन्य जिलों का प्रदर्शन मजबूत दिखाई दिया।
बूंदी नौवें स्थान पर
बूंदी ने रैंकिंग में 64 अंक हासिल किए। इसके साथ जिला नौवें स्थान पर रहा। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति, शिक्षकों की सक्रियता और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे मानकों के आधार पर जिलों का मूल्यांकन किया गया।रैंकिंग का उद्देश्य जिलों में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति का तुलनात्मक आकलन करना है। इसके जरिए स्कूल स्तर पर सामने आने वाली कमियों और सुधार की जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान की जाती है।
कोटा 38वें स्थान पर
41 जिलों की रैंकिंग में कोटा 38वें स्थान पर रहा। जिले का प्रदर्शन 50 अंकों से भी नीचे रहा। रिपोर्ट के अनुसार कोटा को 50 से कम अंक पाने वाले जिलों में शामिल किया गया है।इस श्रेणी में जैसलमेर, प्रतापगढ़, टोंक, कोटा, सलूंबर, डीग और ब्यावर भी शामिल हैं। यानी कुल सात जिलों का स्कोर 50 अंकों से नीचे रहा।
ब्यावर सबसे निचले पायदान पर
ब्यावर ने अगस्त की रैंकिंग में 44 अंक हासिल किए। इसके साथ वह 41 जिलों में अंतिम स्थान पर रहा। रैंकिंग में शामिल जिलों के प्रदर्शन में काफी अंतर दिखाई दिया।वहीं प्रदेश का औसत स्कोर 58.20 रहा। खास बात यह है कि कोई भी जिला 80 अंकों का आंकड़ा पार नहीं कर पाया। इससे शीर्ष जिलों और प्रदेश के औसत प्रदर्शन के बीच अंतर भी सामने आया है।
छह प्रमुख मानकों पर तैयार हुई रैंकिंग
शिक्षा विभाग ने इस बार जिला रैंकिंग के लिए छह प्रमुख मानकों को आधार बनाया। इनमें विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति को सबसे ज्यादा 25 प्रतिशत वेटेज दिया गया।शाला संबलन निरीक्षण लक्ष्य को 20 प्रतिशत और योग्यता एवं दक्षता आधारित मूल्यांकन परिणाम को भी 20 प्रतिशत वेटेज मिला। शिक्षक ऐप पर शिक्षकों की सक्रियता का हिस्सा 15 प्रतिशत रखा गया।इसके अलावा स्कूलों के बुनियादी ढांचे और भौतिक सुविधाओं को 10 प्रतिशत तथा ब्लॉक स्तरीय समीक्षा बैठकों को 10 प्रतिशत वेटेज दिया गया।
31 जिलों का प्रदर्शन मध्यम श्रेणी में
जारी आंकड़ों के मुताबिक सात जिलों का स्कोर 50 से कम रहा। वहीं 31 जिले 50 से 67 अंकों के बीच रहे। इससे पता चलता है कि बड़ी संख्या में जिले अभी उच्च स्कोर वाली श्रेणी तक नहीं पहुंच पाए हैं।शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेश उपाध्यक्ष गजराज सिंह के अनुसार विद्यार्थियों की उपस्थिति, सीखने का स्तर, निरीक्षण व्यवस्था और स्कूलों की मूलभूत सुविधाएं शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार हैं। उनके मुताबिक इन क्षेत्रों पर लगातार निगरानी और सुधार की जरूरत है।