Rajasthan Politics: वसुंधरा राजे का डूंगरपुर में अचानक रुकना बना सियासी चर्चा का विषय, बंद कमरे में कार्यकर्ताओं ने खोली प्रशासन की पोल…
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के डूंगरपुर सर्किट हाउस में हुए अचानक ठहराव ने प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। बंद कमरे में हुई बैठक में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने प्रशासनिक अधिकारियों की ‘अनसुनी’ को लेकर खुलकर शिकायतें कीं। राजे ने सभी से हालचाल पूछते हुए सुझाव लिए, जिससे यह दौरा भले अनौपचारिक रहा हो, लेकिन इसके राजनीतिक संकेत गहरे माने जा रहे हैं।
डूंगरपुर में वसुंधरा राजे का अनपेक्षित ठहराव
बांसवाड़ा जाते समय वसुंधरा राजे का डूंगरपुर रुकना उनके समर्थकों के लिए एक बड़ा मौका बन गया। स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया और तुरंत सर्किट हाउस में बंद कमरे में चर्चा शुरू हुई। राजे के इस ठहराव ने प्रदेश की राजनीति में नए कयासों को जन्म दे दिया है।
बंद कमरे में पूछा—“बताओ, आजकल क्या चल रहा है?”
बैठक में प्रवेश करते ही वसुंधरा राजे ने सरल अंदाज़ में सवाल किया—“बताओ, आजकल क्या चल रहा है?”
उनके इस सवाल पर कार्यकर्ताओं ने अपनी जमकर भड़ास निकाली। पूर्व जिलाध्यक्ष व पूर्व सभापति गुरुप्रसाद पटेल ने साफ कहा कि “प्रशासनिक अधिकारी न कार्यकर्ताओं की सुनते हैं, न जनता की.” उन्होंने अधिकारियों के रवैये को लेकर गहरी नाराज़गी व्यक्त की।
कार्यकर्ताओं ने खोली प्रशासन की ‘अनसुनी’ की कहानी
कई कार्यकर्ताओं ने बताया कि जिले में कई समस्याएँ महीनों से लंबित पड़ी हैं, लेकिन अधिकारियों का सहयोग नहीं मिल रहा। जनता की शिकायतों पर कार्रवाई तक नहीं हो रही। बैठक का फोकस प्रशासनिक ढांचे की खामियों पर ही टिका रहा।
नगर परिषद ने उठाया स्वच्छता और बजट का बड़ा मुद्दा
नगर परिषद सभापति अमृत कलासुआ ने कहा कि डूंगरपुर नगर परिषद लगातार स्वच्छता पुरस्कार जीत रही है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त बजट या इनाम राशि नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि बजट बढ़ेगा तो नए उपकरण खरीदकर शहर में सफाई व्यवस्था और मजबूत की जा सकती है।
राजे ने मीडिया को कहा—‘ये राजनीतिक कार्यक्रम नहीं’
बैठक खत्म होने के बाद मीडिया ने जब वसुंधरा राजे से राज्य सरकार के दो साल के कार्यकाल पर राय मांगी, तो उन्होंने कोई राजनीतिक टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा—
“मैं बांसवाड़ा जा रही हूं, यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है।”
इसके बाद वह विधायक कैलाश मीणा के पुत्र के निधन पर उनके परिवार को सांत्वना देने के लिए रवाना हो गईं।
संकेत साफ: दौरा भले निजी, चर्चा में राजनीतिक गर्माहट
हालांकि राजे ने इसे ‘नॉन-पॉलिटिकल’ बताया, लेकिन बैठक में प्रशासनिक मुद्दों की समीक्षा, कार्यकर्ताओं का खुला असंतोष और राजे का संवाद—सब कुछ यह संकेत देता है कि वसुंधरा राजे अभी भी राज्य की राजनीतिक धारा को बारीकी से परख रही हैं।
इससे यह दौरा राजनीतिक विश्लेषकों के लिए और भी महत्वपूर्ण हो गया है।