राजस्थान पुलिस की सख्त चेतावनी, बैंक अकाउंट किराए पर देना पड़ सकता है भारी
राजस्थान पुलिस ने युवाओं और आमजन को म्यूल बैंक अकाउंट स्कैम को लेकर सावधान किया है। सोशल मीडिया पर पार्ट-टाइम जॉब और आसान कमाई के नाम पर अकाउंट मांगे जा रहे हैं। बदले में खाताधारक को कमीशन देने का लालच दिया जाता है। पुलिस के अनुसार ऐसे खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी और अवैध लेनदेन में हो सकता है। अनजाने में अकाउंट देने वाला व्यक्ति भी जांच के दायरे में आ सकता है। इसलिए बैंक अकाउंट, UPI या ATM कार्ड किसी दूसरे व्यक्ति को देना जोखिम भरा है।
आसान कमाई का लालच देकर फंसाते हैं
साइबर ठग सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन चलाते हैं। इनमें पार्ट-टाइम जॉब और गेम फंड जैसे ऑफर शामिल होते हैं। कुछ मामलों में हर ट्रांजेक्शन पर कमीशन देने की बात कही जाती है।युवा और छात्र कम समय में कमाई के लालच में ऐसे ऑफर स्वीकार कर लेते हैं। इसके बाद उनके बैंक खाते में दूसरे लोगों से ठगी की रकम भेजी जा सकती है। रकम को निकालकर या दूसरे खातों में ट्रांसफर किया जाता है।
क्या होता है म्यूल बैंक अकाउंट?
ऐसे बैंक खातों को आमतौर पर म्यूल अकाउंट कहा जाता है। इनका इस्तेमाल अवैध रकम को एक खाते से दूसरे खाते में पहुंचाने के लिए किया जाता है।पुलिस के मुताबिक इन खातों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों में भी हो सकता है। असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने से पहले जांच खाताधारक तक पहुंच सकती है।
राजस्थान में सामने आए कई मामले
राजस्थान पुलिस के अनुसार वर्ष 2026 में जनवरी से जुलाई के बीच 82 हजार से अधिक म्यूल अकाउंट्स की पहचान की गई। इस अवधि में 723 से ज्यादा मामले दर्ज हुए। पुलिस कार्रवाई में 650 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की बात भी सामने आई है।नागौर में सामने आए एक इंटर-स्टेट नेटवर्क में 24 लोगों की गिरफ्तारी बताई गई। जांच में 84 म्यूल अकाउंट्स के जरिए करोड़ों रुपये के लेनदेन की जानकारी सामने आई।
कई जिलों में कार्रवाई
भावानीमंडी में पुलिस कार्रवाई के दौरान तीन आरोपियों से 53 एटीएम कार्ड, चेकबुक और नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई। जोधपुर, अलवर, झुंझुनूं, सीकर और जयपुर में भी ऐसे मामलों में कार्रवाई हुई है।कुछ मामलों में युवाओं को अकाउंट उपलब्ध कराने के बदले 8 हजार से 15 हजार रुपये तक कमीशन मिलने की बात सामने आई। लेकिन बाद में वही खाते साइबर अपराध की जांच का हिस्सा बन गए।
करोड़ों के लेनदेन की जांच
जयपुर में सामने आए एक मामले में 6.80 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड में म्यूल अकाउंट्स और क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल की बात सामने आई। वहीं झुंझुनूं में संदिग्ध बैंक खातों के जरिए करीब 200 करोड़ रुपये के लेनदेन की जांच का मामला सामने आया था।इन मामलों से साफ है कि छोटा कमीशन लेने के लिए बैंक अकाउंट देना गंभीर कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है। हालांकि प्रत्येक मामले में खाताधारक की भूमिका जांच के तथ्यों के आधार पर तय होती है।
बैंक अकाउंट और UPI किसी को न दें
पुलिस की सलाह है कि अपना बैंक अकाउंट किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें। इसके साथ ही UPI आईडी, एटीएम कार्ड, चेकबुक और बैंकिंग पासवर्ड भी साझा नहीं करना चाहिए।अगर कोई व्यक्ति अकाउंट देने के बदले कमीशन का ऑफर देता है तो सावधान रहें। ऐसे ऑफर को स्वीकार करने के बजाय संबंधित बैंक या पुलिस को इसकी जानकारी दी जा सकती है।
साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत करें शिकायत
अगर आपके खाते में संदिग्ध रकम आती है या साइबर फ्रॉड का पता चलता है तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। साइबर अपराध की शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क किया जा सकता है।राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के जरिए भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। शिकायत में देरी होने पर रकम की रिकवरी मुश्किल हो सकती है।
पुलिस की युवाओं से अपील
राजस्थान पुलिस ने युवाओं से आसान कमाई के लालच में बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करने की अपील की है। किसी दूसरे व्यक्ति के कहने पर अपने खाते से लेनदेन कराना भी जोखिम भरा हो सकता है।पुलिस का संदेश है कि कुछ हजार रुपये के कमीशन के लिए बैंक अकाउंट देना भविष्य में बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है। इसलिए सतर्क रहें और संदिग्ध ऑनलाइन ऑफर से दूरी बनाए रखें।