Rajasthan Nikay Chunav: वोटिंग खत्म होते ही शुरू होगा ‘बाड़ेबंदी’ का खेल, BJP-कांग्रेस ने तैयार किया प्लान
राजस्थान निकाय चुनाव में मतदान खत्म होते ही अब सियासी रणनीति का अगला दौर शुरू होने वाला है। प्रदेश के 169 नगरीय निकायों में परिणाम आने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने की कवायद में जुटेंगी। बहुमत के करीब रहने वाले निकायों में होटल-रिसॉर्ट में पार्षदों को साथ रखने से लेकर मजबूत निर्दलीयों से संपर्क तक, दोनों दलों ने बोर्ड गठन की तैयारी शुरू कर दी है। अध्यक्ष और सभापति के चुनाव तक चलने वाली इस सियासी बाजी में क्रॉस वोटिंग रोकना सबसे बड़ी चुनौती होगी। बोर्ड गठन की प्रक्रिया 20 और 21 सितंबर को होने वाले चुनावों के साथ निर्णायक दौर में पहुंचेगी।
BJP का ‘ऑपरेशन बोर्ड’, प्रशिक्षण वर्ग के नाम पर बाड़ेबंदी
मतदान समाप्त होते ही भाजपा उन निकायों पर फोकस करेगी, जहां पार्टी बहुमत के आंकड़े के आसपास रह सकती है। ऐसे निकायों में चुनाव परिणाम के बाद पार्षदों को होटल या रिसॉर्ट में एक साथ रखने की रणनीति बनाई जा रही है। पार्टी की ओर से इस पूरी कवायद को ‘प्रशिक्षण वर्ग’ का नाम दिया गया है।
भाजपा संगठन ने स्थानीय समीकरणों के आधार पर बाड़ेबंदी का फैसला लेने की जिम्मेदारी जिलाध्यक्षों और निकाय प्रभारियों को दी है। जिन निकायों में स्पष्ट बहुमत होगा, वहां ऐसी व्यवस्था की जरूरत कम हो सकती है। लेकिन जहां मुकाबला बेहद करीबी होगा, वहां पार्टी अपने पार्षदों को एकजुट रखने पर ज्यादा जोर देगी।
निर्दलीय और बागी प्रत्याशियों पर भी BJP की नजर
बोर्ड गठन में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका कई निकायों में महत्वपूर्ण हो सकती है। भाजपा ने ऐसे मजबूत निर्दलीय और बागी प्रत्याशियों पर नजर रखने की रणनीति बनाई है, जिनका समर्थन बोर्ड बनाने के लिए जरूरी हो सकता है।
स्थानीय नेताओं और निकाय प्रभारियों को ऐसे प्रत्याशियों से संपर्क साधने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। पार्टी की कोशिश होगी कि परिणाम आने के बाद बहुमत के लिए जरूरी संख्या जुटाने में किसी तरह की परेशानी न हो।
कांग्रेस ने भी शुरू की बाड़ेबंदी की तैयारी
भाजपा की तरह कांग्रेस ने भी कांटे के मुकाबले वाले निकायों के लिए अपनी रणनीति तैयार की है। पार्टी ने जिला और विधानसभा प्रभारियों के साथ विधायकों तथा वरिष्ठ नेताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं।
कांग्रेस की नजर सिर्फ पार्टी प्रत्याशियों पर नहीं बल्कि विचारधारा से जुड़े मजबूत निर्दलीयों पर भी है। ऐसे निकाय जहां अध्यक्ष या सभापति का चुनाव बेहद करीबी होने की संभावना है, वहां निर्दलीय पार्षद निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
मतदान के तुरंत बाद या मतगणना से पहले शिफ्ट होंगे पार्षद
कांग्रेस स्थानीय चुनावी समीकरणों के हिसाब से बाड़ेबंदी का समय तय करेगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जिन निकायों में जोड़-तोड़ या क्रॉस वोटिंग की आशंका ज्यादा होगी, वहां पार्षदों को मतदान के तुरंत बाद सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा सकता है।
वहीं कुछ निकायों में मतगणना से एक-दो दिन पहले पार्षदों को एक साथ रखने की रणनीति अपनाई जा सकती है। जरूरत पड़ने पर कुछ पार्षदों को राजस्थान से बाहर ले जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।
होटल-रिसॉर्ट पहले से चिह्नित, कई जगह बुकिंग
कांग्रेस ने संभावित बाड़ेबंदी के लिए होटल और रिसॉर्ट समेत कई ठिकाने चिह्नित किए हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कुछ स्थानों पर बुकिंग भी की जा चुकी है।
इस पूरी रणनीति का मकसद नतीजों के बाद होने वाली संभावित राजनीतिक जोड़-तोड़ को रोकना और पार्टी के पार्षदों को एकजुट रखना है। खासकर त्रिकोणीय और बहुकोणीय मुकाबले वाले निकायों में निर्दलीय पार्षदों की संख्या बोर्ड गठन का समीकरण बदल सकती है।
20 सितंबर को अध्यक्ष-सभापति का चुनाव
निकाय चुनाव के नतीजों के बाद सबसे बड़ा सियासी मुकाबला बोर्ड गठन को लेकर होगा। महापौर और सभापति के चुनाव 20 सितंबर को प्रस्तावित हैं। इसके अगले दिन 21 सितंबर को उपमहापौर और उपसभापति के चुनाव होंगे।
यही वजह है कि मतदान खत्म होने के साथ ही राजनीतिक दलों की असली रणनीति सामने आएगी। नतीजों के बाद किस दल के पास कितनी सीटें आती हैं और कितने निर्दलीय उसके साथ जाते हैं, इससे बोर्ड गठन का पूरा गणित तय होगा।
क्रॉस वोटिंग रोकना सबसे बड़ी चुनौती
निकाय चुनाव में पार्टी के पास बहुमत होने के बावजूद अध्यक्ष या सभापति के चुनाव में क्रॉस वोटिंग का खतरा बना रहता है। यही कारण है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने पार्षदों को नतीजे आने के बाद एकजुट रखने की कोशिश कर रही हैं।
अब नजर चुनाव परिणामों पर होगी। अगर किसी निकाय में भाजपा या कांग्रेस बहुमत से कुछ सीट दूर रहती है तो निर्दलीय और बागी पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाएगी। ऐसे में 20 और 21 सितंबर तक राजस्थान की स्थानीय राजनीति में जोड़-तोड़ और रणनीतिक संपर्कों का दौर तेज रहने की संभावना है।