राजस्थान विधानसभा बजट सत्र 2026: सवालों पर नए दिशा-निर्देश जारी
राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होने जा रहा है। सत्र से पहले विधानसभा ने एक सर्कुलर जारी किया है, जिसमें विधायकों को प्रश्न पूछने के लिए नए दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य विधानसभा की बहस को अधिक प्रभावी और जनहित केंद्रित बनाना है।
सवालों की संख्या और प्रकार में सीमाएं
विधायकों को अब हर तारांकित और अंतारांकित सवाल की सीमा 10 तक तय की गई है। यह नियम विधानसभा की नियमावली 37(2) के तहत लागू होगा। साथ ही, राज्य या जिला स्तरीय सवालों की बजाय स्थानीय और जनहित से जुड़े सवाल प्राथमिकता में रहेंगे।
यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि विधानसभा का समय लंबी और अनावश्यक बहस में न जाए और सदन में अधिक प्रभावी और लोकहित विषयों पर ध्यान केंद्रित हो।
तुच्छ और ऑनलाइन उपलब्ध विषयों पर सवालों पर पाबंदी
सर्कुलर में साफ कहा गया है कि यदि किसी विषय की जानकारी विभाग की वेबसाइट पर पहले से उपलब्ध है, तो ऐसे विषयों पर सवाल नहीं पूछे जाएंगे। इसके अलावा, तुच्छ या गैर-जरूरी विषयों पर सवाल लगाना भी वर्जित होगा।
यह नियम सदस्यों को प्रेरित करता है कि वे डिजिटल जानकारी का उपयोग करें और विधानसभा में केवल नई या महत्वपूर्ण जानकारियों पर सवाल उठाएं।
सवालों में शामिल नहीं होने वाले विषय
निम्नलिखित विषयों पर सवाल नहीं पूछे जा सकेंगे:
- किसी मंत्री से संबंधित न होने वाले विषय।
- अनुमान, व्यंग्य, मानहानि या गैर जरूरी विशेषण शामिल करने वाले सवाल।
- राय या काल्पनिक समाधान मांगने वाले सवाल।
- किसी व्यक्ति के चारित्रिक आचरण पर गैर जरूरी टिप्पणी।
- अदालत में विचाराधीन मामले।
- अत्यधिक लंबा या मुख्यतः सरकार से संबंधित नहीं विषय।
यह निर्देश सदन में सवालों की गुणवत्ता और सदस्यों की जिम्मेदारी बढ़ाने के लिए है, ताकि चर्चा सतही न हो।
पहले भी लागू हो चुके हैं ऐसे नियम
जानकारों के अनुसार, विधानसभा में सवालों को सीमित करने की परंपरा नई नहीं है। इससे पहले भी अध्यक्षों ने ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी वाले विषयों पर सवालों को रोककर बहस को सार्थक बनाया था।
यह कदम सदन की कार्यवाही को ज्यादा प्रभावी और समय-सक्षम बनाने के प्रयासों का हिस्सा है, जिससे जनता के लिए वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।