राजस्थान के 309 निकायों में आरक्षण लॉटरी, कई सीटें OBC के लिए आरक्षित
इंट्रो: राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव से पहले प्रमुख पदों के आरक्षण की तस्वीर साफ होने लगी है। जयपुर स्थित स्वायत्त शासन विभाग में राज्य के 309 शहरी निकायों के महापौर, सभापति और अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसमें 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगरपालिकाओं के प्रमुख पदों का वर्गवार आरक्षण तय किया जा रहा है। अलग-अलग संभागों की लॉटरी में कई सीटें OBC और OBC महिला वर्ग के लिए आरक्षित की गई हैं। आरक्षण तय होने के बाद चुनावी मैदान में उतरने वाले दावेदारों और राजनीतिक दलों की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
309 निकायों के प्रमुख पदों का तय होगा आरक्षण
स्वायत्त शासन विभाग के सभागार में सुबह करीब साढ़े 10 बजे आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके तहत प्रदेश के 309 शहरी निकायों के प्रमुख पदों का वर्गवार आरक्षण निर्धारित किया जा रहा है। इनमें 10 नगर निगमों के महापौर, 51 नगर परिषदों के सभापति और 248 नगरपालिकाओं के अध्यक्ष पद शामिल हैं। प्रक्रिया में विभिन्न संभागों के निकायों को आरक्षण के अलग-अलग वर्गों में रखा जा रहा है। आरक्षण की पूरी तस्वीर सामने आने के बाद स्थानीय निकाय चुनाव की तैयारियां और तेज होने की संभावना है, क्योंकि कई संभावित उम्मीदवारों की दावेदारी सीट के आरक्षण पर निर्भर करेगी।
अजमेर संभाग में कई सीटें OBC के खाते में
आरक्षण लॉटरी में सबसे पहले अजमेर संभाग की सीटों को शामिल किया गया। यहां नावां, नागौर, हमीरगढ़, रियाबड़ी, सरवाड़, लाडनूं, जायल, डीडवाना, बासनी और जैतारण को OBC वर्ग के लिए आरक्षित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा तीन सीटें OBC महिला वर्ग के लिए रखी गई हैं। आरक्षण की इस प्रक्रिया से स्थानीय स्तर पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों के समीकरण बदल सकते हैं। जिन सीटों पर पहले सामान्य वर्ग के संभावित उम्मीदवार सक्रिय थे, वहां अब संबंधित आरक्षित वर्ग से नए चेहरे सामने आने की संभावना है।
कोटा संभाग में अकलेरा से कोटा तक OBC आरक्षण
कोटा संभाग में भी कई प्रमुख निकायों को OBC वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अकलेरा, झालावाड़, अंता, कोटा और सुकेत को OBC वर्ग में रखा गया है। आरक्षण तय होने के साथ इन क्षेत्रों में स्थानीय राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता बढ़ सकती है। खास तौर पर उन नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण है, जो निकाय प्रमुख के पद के लिए लंबे समय से तैयारी कर रहे थे। अब उन्हें आरक्षण के मुताबिक अपनी रणनीति और उम्मीदवारों का चयन करना होगा।
बीकानेर और भरतपुर संभाग में भी बदले समीकरण
बीकानेर संभाग में लूणकरणसर, सुजानगढ़, खाजूवाला, केसरीसिंहपुर, सरदारशहर, राजगढ़, चूरू और नोखा को OBC वर्ग के लिए आरक्षित किए जाने की जानकारी है। वहीं भरतपुर संभाग में राजाखेड़ा और सरमथुरा को OBC महिला वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। इसके अलावा रूपवास, बौंली, बृजनगर और सवाई माधोपुर को OBC वर्ग में रखा गया है। इन आरक्षणों के बाद स्थानीय निकायों में टिकट वितरण का गणित बदलना तय माना जा रहा है। राजनीतिक दलों को अब जातीय और सामाजिक समीकरणों के साथ नए दावेदारों पर भी विचार करना होगा।
जयपुर संभाग के 19 निकाय OBC के लिए आरक्षित
जयपुर संभाग में भी OBC आरक्षण का असर व्यापक दिखाई दे रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अजीतगढ़, विराटनगर, विद्याविहार, मलसीसर, नीमराना, बहादुरपुर, बांदीकुई, भिवाड़ी, श्रीमाधोपुर, खेतड़ी, राजगढ़, चिड़ावा, दौसा, खाटूश्यामजी, पलसाना, दांतारामगढ़, मुंडावर और डूंडलोद सहित कई निकायों को OBC वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। वहीं बांदीकुई, दौसा, नौगांव, खेतड़ी, नीमराना और खाटूश्यामजी को OBC महिला वर्ग के लिए आरक्षित किए जाने की जानकारी है। इससे जयपुर संभाग में चुनावी दावेदारों का गणित काफी हद तक बदल सकता है।
कई निकाय अनारक्षित वर्ग में भी रखे गए
आरक्षण प्रक्रिया में बड़ी संख्या में निकायों को अनारक्षित वर्ग में भी रखा गया है। उपलब्ध सूची में जयपुर, बहरोड़, बिसाऊ, पिलानी, मुकुंदगढ़, किशनगढ़बास, रामगढ़ शेखावाटी, बानसूर, खंडेला, नारायणपुर, अलवर, लक्ष्मणगढ़, फागी, कालाडेरा, कोटकासिम, तिजारा, चाकसू, फुलेरा, जोबनेर और नीमकाथाना सहित कई निकायों के नाम शामिल हैं। अनारक्षित सीटों पर अब विभिन्न वर्गों के उम्मीदवार दावेदारी कर सकेंगे। ऐसे में इन निकायों में टिकट को लेकर राजनीतिक दलों के भीतर प्रतिस्पर्धा और गुटबाजी बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।
उदयपुर संभाग में पांच निकाय OBC वर्ग में
उदयपुर संभाग की लॉटरी में सागवाड़ा, देवगढ़, धरियावद, कानोड़ और कुशलगढ़ को OBC वर्ग के लिए आरक्षित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें सागवाड़ा और देवगढ़ को OBC महिला वर्ग के लिए रखा गया है। वहीं रावतभाटा, डूंगरपुर, भीम, छोटी सादड़ी, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और गढ़ी को अनारक्षित वर्ग में रखा गया है। आरक्षण की इस तस्वीर के बाद संबंधित निकायों में संभावित प्रत्याशियों की राजनीतिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। स्थानीय संगठन अब आरक्षित वर्ग के अनुसार उपयुक्त और मजबूत उम्मीदवारों की तलाश में जुट सकते हैं।
जिला प्रमुख पदों की भी होगी आरक्षण लॉटरी
नगरीय निकायों के बाद जिला प्रमुख पदों के लिए भी आरक्षण प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। जानकारी के अनुसार जिला प्रमुख पदों के लिए आरक्षण लॉटरी गुरुवार को पंचायतीराज संस्थान में दोपहर 3.15 बजे प्रस्तावित है। राज्य में कुल 41 जिला परिषद हैं और इनके चुनाव एक साथ होने हैं। वहीं जिला परिषद सदस्यों के आरक्षण के लिए 17 अगस्त को जिला स्तर पर लॉटरी प्रस्तावित की गई है। जिला प्रमुख और सदस्यों के आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद पंचायत चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां और तेज होने की संभावना है।
पारदर्शिता के लिए ऑफलाइन हुई लॉटरी
आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया ऑनलाइन कराने के बजाय ऑफलाइन रखी गई है। इसमें राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। बताया गया कि कुछ राजनीतिक दलों ने ऑनलाइन लॉटरी की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर आशंकाएं जताई थीं। इसके बाद विभाग ने ऑफलाइन प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया। पूरी प्रक्रिया में करीब छह घंटे लगने का अनुमान है। राजनीतिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में लॉटरी कराने का उद्देश्य प्रक्रिया को लेकर विश्वास और पारदर्शिता बनाए रखना बताया जा रहा है। आरक्षण की तस्वीर स्पष्ट होने के बाद अब चुनावी तैयारियों का अगला चरण शुरू होगा।
आरक्षण तय होते ही तेज होगी टिकट की दौड़
निकाय प्रमुखों के पदों का आरक्षण राजनीतिक दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सीट आरक्षित होने के बाद कई पुराने दावेदार चुनावी दौड़ से बाहर हो सकते हैं, जबकि आरक्षित वर्ग के नए चेहरों को मौका मिल सकता है। वहीं अनारक्षित सीटों पर टिकट के लिए कई नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है। भाजपा और कांग्रेस समेत अन्य दलों को स्थानीय सामाजिक समीकरण, संगठन में सक्रियता और जीत की संभावनाओं को ध्यान में रखकर प्रत्याशी तय करने होंगे। इस तरह आरक्षण लॉटरी ने राजस्थान के निकाय चुनाव का राजनीतिक मंच तैयार करने की दिशा में अहम कदम बढ़ा दिया है।