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टोंक में सियासी वार-पलटवार: पायलट पर हमला, गहलोत ने ‘मानेसर कांड’ से दिया जवाब


Tonk में भाजपा कार्यक्रम के बाद सियासत गरमा गई है। भाजपा प्रभारी के बयान में Sachin Pilot पर तीखे हमले हुए, तो पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने ‘मानेसर कांड’ का जिक्र करते हुए पलटवार किया और कांग्रेस की एकजुटता का दावा किया।

भाजपा का टोंक से बड़ा सियासी संदेश

टोंक में आयोजित भाजपा कार्यक्रम के बाद पूर्वी राजस्थान की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पार्टी यहां से अपनी पकड़ मजबूत करने का संकेत दे रही है, खासकर उस क्षेत्र में जहां सचिन पायलट का प्रभाव माना जाता है। मंच से नेताओं ने स्पष्ट किया कि भाजपा आगामी चुनावों में टोंक जिले की सभी सीटों पर जीत हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह आयोजन केवल संगठनात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।

पायलट पर तीखा हमला, ‘बहुरूपिया’ तक कहा

भाजपा प्रदेश प्रभारी Radha Mohan Das Agrawal ने अपने संबोधन में सचिन पायलट पर व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों तरह के प्रहार किए। उन्होंने पायलट को ‘बाहरी’ बताते हुए कहा कि टोंक की जनता को भ्रमित किया गया है। इतना ही नहीं, उन्होंने पायलट को ‘बहुरूपिया विधायक’ तक कह दिया और यह भी टिप्पणी की कि उनकी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस बयान ने सियासी माहौल को और ज्यादा गरमा दिया।

गहलोत का पलटवार, ‘मानेसर कांड’ की याद दिलाई

भाजपा के हमलों के बाद अशोक गहलोत ने तीखा जवाब देते हुए ‘मानेसर कांड’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सचिन पायलट अब पहले से ज्यादा समझदार हो गए हैं और पिछली गलतियों से सीख चुके हैं। गहलोत ने स्पष्ट किया कि पायलट कांग्रेस में ही रहेंगे और पार्टी पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले उन्हें बहला-फुसलाकर मानेसर ले जाया गया था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप

अशोक गहलोत ने भाजपा पर हमला जारी रखते हुए कहा कि केंद्र सरकार विभिन्न संस्थाओं का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग, ईडी जैसी संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में कुछ भी संभव है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े होते हैं।

पूर्वी राजस्थान में बढ़ी सियासी सरगर्मी

टोंक की इस राजनीतिक बयानबाजी के बाद पूरे पूर्वी राजस्थान में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। भाजपा जहां इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस भी अपने गढ़ को बचाने में जुटी है। आने वाले समय में इस क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है, जिससे चुनावी माहौल और दिलचस्प हो सकता है।

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