पीएम मोदी का बड़ा सुधार एजेंडा: ‘ब्यूरोक्रेटिक साइलो’ खत्म करने पर जोर, जानें ‘गतिशक्ति मास्टर प्लान’ क्यों अहम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय सचिवों के साथ एक उच्चस्तरीय और लंबी बैठक में सरकारी कामकाज की गति और दक्षता बढ़ाने पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने विभागों के बीच मौजूद “ब्यूरोक्रेटिक साइलो” यानी अलग-अलग काम करने की प्रवृत्ति को खत्म करने के निर्देश दिए। पीएम मोदी ने कहा कि सभी मंत्रालयों को एकीकृत दृष्टिकोण अपनाकर काम करना होगा। इसके लिए ‘पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान’ के व्यापक उपयोग पर जोर दिया गया। यह बैठक प्रशासनिक सुधारों, डिजिटल गवर्नेंस और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
ब्यूरोक्रेटिक साइलो खत्म करने की बड़ी पहल
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में स्पष्ट किया कि सरकारी विभागों के बीच तालमेल की कमी विकास कार्यों में सबसे बड़ी बाधा बनती है। उन्होंने कहा कि हर मंत्रालय को अपनी सीमित सोच से बाहर निकलकर “पूरे सरकार” (Whole of Government) के दृष्टिकोण को अपनाना होगा। पीएम ने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं को अलग-अलग देखने के बजाय उन्हें एक साझा राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में लागू किया जाए। इस बदलाव से न केवल परियोजनाओं में तेजी आएगी, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।
‘गतिशक्ति मास्टर प्लान’ क्यों है गेमचेंजर
बैठक में पीएम मोदी ने ‘पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान’ को केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर टूल नहीं, बल्कि डेटा-आधारित समन्वय का शक्तिशाली माध्यम बताया। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच योजनाओं की मैपिंग और समन्वय को आसान बनाता है। इससे सड़क, रेलवे, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स जैसी परियोजनाओं में तेजी आने की संभावना है। पीएम ने कहा कि इस प्लेटफॉर्म से रुके हुए प्रोजेक्ट्स को गति मिलेगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा, जिससे देश की विकास दर को मजबूती मिलेगी।
सुधार एजेंडा और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर फोकस
प्रधानमंत्री ने बैठक में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ को और मजबूत करने पर जोर दिया। अधिकारियों ने विभिन्न विभागों में चल रहे सुधारों की प्रगति की जानकारी दी और बताया कि कैसे नियमों को सरल बनाकर नागरिकों और कारोबारियों पर बोझ कम किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य प्रशासनिक दक्षता बढ़ाकर आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाना है। इस बैठक को 2026 की नीतिगत प्राथमिकताओं के लिए नौकरशाही को नई दिशा देने के रूप में देखा जा रहा है।
नतीजों की समयसीमा पर सख्त रुख
पीएम मोदी ने बैठक में यह भी स्पष्ट किया कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि तय समयसीमा के भीतर परिणाम देना जरूरी है। सरकार ने हाल ही में कई मंत्रालयों में “52 सप्ताह में 52 सुधार” जैसी पहल शुरू की है, जिससे तेज गति से बदलाव सुनिश्चित किया जा सके। यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे मंत्रालयों को अपनी प्रगति का मूल्यांकन करने, बाधाओं को दूर करने और आपसी समन्वय को मजबूत करने का अवसर मिला है।