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आतंकवाद विरोधी कार्रवाई या नागरिकों पर हमला? पाकिस्तान की सैन्य नीति पर उठे गंभीर सवाल


पाकिस्तान की आतंकवाद-रोधी सैन्य कार्रवाई एक बार फिर विवादों में है। हालिया हवाई हमलों और सैन्य कार्रवाई में बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत के बाद सुरक्षा नीति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक सिर्फ 48 घंटों में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में 26 पख्तून नागरिकों की जान चली गई।


✈️ अफगानिस्तान में हवाई हमले और नागरिक मौतें

20-21 फरवरी 2026 की रात पाकिस्तान की सेना ने अफगानिस्तान के Nangarhar Province के बेसूद क्षेत्र में हवाई हमले किए।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने दावा किया कि निशाना Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) के ठिकाने थे, लेकिन स्थानीय अफगान प्रशासन और क्षेत्रीय सूत्रों का कहना है कि हमला रिहायशी इलाके पर हुआ।
रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में 17 नागरिकों की मौत हुई, जिनमें 11 बच्चे शामिल थे।


💥 पाकिस्तान के अंदर भी हिंसा, वाहन पर गिरा मोर्टार

अफगान हमले के 24 घंटे के भीतर पाकिस्तान के Khyber District की तिराह घाटी में एक नागरिक वाहन पर मोर्टार गिरने से पांच पख्तून नागरिकों की मौत हो गई।
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने सैन्य चौकी के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।


🔫 प्रदर्शन के दौरान फायरिंग, बढ़ा आक्रोश

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रदर्शनकारी निहत्थे थे, लेकिन सुरक्षा बलों की गोलीबारी में चार और लोगों की मौत हो गई तथा कई लोग घायल हुए।
इस तरह केवल 48 घंटों में दो देशों में कुल 26 लोगों की मौत ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया।


📊 लगातार बढ़ रही नागरिक मौतें

मानवाधिकार समूहों और स्थानीय स्रोतों के अनुसार:

  • जनवरी 2025 से पाकिस्तान में आतंकवाद-रोधी अभियानों में 168 से अधिक पख्तून नागरिकों की मौत हुई।
  • सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच अफगानिस्तान में पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई में कम से कम 88 नागरिकों के मारे जाने की रिपोर्ट है।

इन आंकड़ों ने सैन्य अभियानों की प्रकृति पर गंभीर बहस शुरू कर दी है।


⚖️ सरकार बनाम आलोचक: दो अलग दावे

पाकिस्तानी सरकार का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय आतंकी नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है।
वहीं आलोचकों का आरोप है कि सैन्य अभियान लगातार पश्तून बहुल इलाकों को प्रभावित कर रहे हैं, जहां भारी सैन्य तैनाती, चेकपोस्ट और कर्फ्यू जैसी परिस्थितियों में आम नागरिकों का जीवन कठिन हो गया है।


🧭 सुरक्षा नीति या मानवीय संकट?

विशेषज्ञों के अनुसार हालिया घटनाएं तीन बड़े सवाल खड़े करती हैं:

  • क्या आतंकवाद विरोधी कार्रवाई में नागरिक सुरक्षा प्राथमिकता है?
  • क्या सीमावर्ती इलाकों में सैन्य रणनीति संतुलित है?
  • क्या लगातार ऑपरेशन स्थानीय असंतोष और अस्थिरता बढ़ा रहे हैं?

इन घटनाओं ने पाकिस्तान की सुरक्षा नीति और जवाबदेही पर नई बहस छेड़ दी है।


🌍 बढ़ती जवाबदेही की मांग

लगातार नागरिक मौतों के बाद स्थानीय समुदायों में गुस्सा बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारदर्शिता व जांच की मांग तेज हो रही है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो क्षेत्रीय तनाव और आंतरिक अस्थिरता दोनों बढ़ सकते हैं।

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