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चीन और तुर्की से हथियारों का जखीरा जुटा रहा पाकिस्तान, ड्रोन से लेकर स्टील्थ फाइटर जेट तक बढ़ा रहा सैन्य दम

पाकिस्तान अपनी सैन्य क्षमताओं को तेजी से आधुनिक बनाने में जुटा है। चीन और तुर्की के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाते हुए उसने ड्रोन, लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां, हेलीकॉप्टर और आर्टिलरी सिस्टम जैसे कई उन्नत सैन्य प्लेटफॉर्म हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सैन्य आधुनिकीकरण क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन और दक्षिण एशिया की सामरिक स्थिति पर असर डाल सकता है।

सैन्य आधुनिकीकरण पर पाकिस्तान का बढ़ा फोकस

पाकिस्तान ने हाल के वर्षों में अपनी सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बनाने की रफ्तार तेज कर दी है। इसके तहत चीन और तुर्की से उन्नत हथियार प्रणालियों की खरीद और रक्षा सहयोग को विस्तार दिया जा रहा है। ड्रोन, लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां, हेलीकॉप्टर और आधुनिक तोप प्रणाली जैसे प्लेटफॉर्म इस योजना का हिस्सा हैं। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार इस कदम का उद्देश्य वायु, समुद्री और जमीनी तीनों मोर्चों पर अपनी सैन्य क्षमता को मजबूत करना है। इससे क्षेत्रीय रक्षा संतुलन पर भी नजर रखी जा रही है।

तुर्की से आधुनिक ड्रोन बेड़े को मिल रही मजबूती

तुर्की पाकिस्तान के लिए ड्रोन तकनीक का प्रमुख साझेदार बनकर उभरा है। पाकिस्तान पहले ही बायरकटार TB2 और अकिंसी जैसे आधुनिक कॉम्बैट ड्रोन अपने बेड़े में शामिल कर चुका है। रिपोर्टों के अनुसार वह बड़ी संख्या में अतिरिक्त मानव रहित हवाई वाहनों (UAV) की खरीद की दिशा में भी काम कर रहा है। इन ड्रोन का उपयोग निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और सटीक हथियारों से लक्ष्यों पर हमला करने के लिए किया जाता है। लंबी दूरी तक संचालन और आधुनिक सेंसर तकनीक इन्हें आधुनिक युद्ध का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती है।

चीन से स्टील्थ फाइटर जेट और पनडुब्बियों की खरीद

पाकिस्तान ने चीन के साथ रक्षा सहयोग के तहत J-35 स्टील्थ फाइटर जेट और हंगोर क्लास पनडुब्बियों की खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। J-35 को पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान माना जाता है, जिसे कम रडार पहचान और लंबी दूरी के अभियानों के लिए विकसित किया गया है। वहीं हंगोर क्लास पनडुब्बियां एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक से लैस हैं, जिससे वे लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकती हैं। इन प्लेटफॉर्मों का उद्देश्य पाकिस्तान की वायु और नौसैनिक क्षमताओं को मजबूत करना है।

अटैक हेलीकॉप्टर और आर्टिलरी सिस्टम भी बने रणनीति का हिस्सा

चीन निर्मित Z-10ME अटैक हेलीकॉप्टर भी पाकिस्तान के सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा हैं। यह हेलीकॉप्टर एंटी-टैंक मिसाइलों, रॉकेट और एयर-टू-एयर हथियारों से लैस होकर दिन और रात दोनों समय अभियान चला सकता है। इसके अलावा पाकिस्तान ने SH-15 155 मिमी सेल्फ-प्रोपेल्ड गन सिस्टम भी खरीदे हैं। यह आधुनिक तोप प्रणाली लंबी दूरी तक सटीक फायर करने की क्षमता रखती है और तेज़ी से अपनी स्थिति बदलने में सक्षम मानी जाती है, जिससे युद्धक्षेत्र में इसकी उपयोगिता बढ़ जाती है।

दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर क्या होगा असर?

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का सैन्य आधुनिकीकरण दक्षिण एशिया में सामरिक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, किसी भी देश की सैन्य खरीद केवल उसकी रक्षा नीति का एक हिस्सा होती है और वास्तविक प्रभाव उसके प्रशिक्षण, रणनीति, रखरखाव तथा परिचालन क्षमता पर भी निर्भर करता है। भारत भी समानांतर रूप से स्वदेशी रक्षा उत्पादन, आधुनिक हथियार प्रणालियों और सैन्य आधुनिकीकरण पर लगातार निवेश कर रहा है। ऐसे में क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य आने वाले वर्षों में और अधिक तकनीक-केंद्रित होने की संभावना है।

पाकिस्तान की प्रमुख रक्षा खरीद

  • तुर्की: बायरकटार TB2 और अकिंसी कॉम्बैट ड्रोन, अतिरिक्त UAV की संभावित खरीद।
  • चीन: J-35 स्टील्थ फाइटर जेट।
  • चीन: हंगोर क्लास AIP पनडुब्बियां।
  • चीन: Z-10ME अटैक हेलीकॉप्टर।
  • चीन: SH-15 155 मिमी सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी सिस्टम।
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