चिकित्सा शिक्षा विभाग में नॉन मेडिको को बड़ी जिम्मेदारी, अपर संचालक पद को लेकर डॉक्टरों में नाराजगी
छत्तीसगढ़ के चिकित्सा शिक्षा विभाग में एक प्रशासनिक नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। राज्य शासन ने एक राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को चिकित्सा शिक्षा विभाग में अपर संचालक की जिम्मेदारी दी है। डॉक्टरों का कहना है कि यह पद परंपरागत रूप से वरिष्ठ चिकित्सकों को दिया जाता रहा है, ऐसे में नॉन मेडिको अधिकारी की नियुक्ति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अधिकारी को एडिशनल डायरेक्टर की जिम्मेदारी दी जाएगी। नियुक्ति को लेकर मेडिकल टीचर्स के बीच असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है।
पहली बार डॉक्टर के बजाय प्रशासनिक अधिकारी को मिली जिम्मेदारी
जानकारी के अनुसार चिकित्सा शिक्षा विभाग में एडिशनल डायरेक्टर के पद पर अब तक वरिष्ठ डॉक्टरों को जिम्मेदारी दी जाती रही है। इस बार राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी की नियुक्ति किए जाने से विभाग में चर्चा तेज हो गई है। डॉक्टरों का कहना है कि चिकित्सा शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों, योजनाओं और मेडिकल नियमों को समझने के लिए विशेषज्ञ अनुभव जरूरी होता है। इसी आधार पर वे नॉन मेडिको अधिकारी की नियुक्ति पर आपत्ति जता रहे हैं।
पदनाम को लेकर भी उठे सवाल
राज्य शासन के आदेश में अधिकारी को अपर संचालक पद का उल्लेख किया गया है, जबकि चिकित्सा शिक्षा विभाग के सेटअप में एडिशनल डायरेक्टर का पद बताया जाता है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार प्रशासनिक अधिकारी को एडिशनल डायरेक्टर की जिम्मेदारी दी जाएगी। हालांकि पदनाम और जिम्मेदारी को लेकर भी विभाग के भीतर चर्चा शुरू हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टरों ने जताया विरोध, मेडिकल टीचर ग्रुप में बढ़ी नाराजगी
नॉन मेडिको अधिकारी को महत्वपूर्ण पद दिए जाने के फैसले के बाद डॉक्टरों के बीच विरोध शुरू हो गया है। मेडिकल टीचर ग्रुप में इस मुद्दे को लेकर चर्चा चल रही है। डॉक्टरों का तर्क है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग में अकादमिक, तकनीकी और मेडिकल नीतियों से जुड़े कार्य होते हैं, जिनके लिए चिकित्सा क्षेत्र की समझ जरूरी है। उनका कहना है कि इस तरह की नियुक्तियों से विभागीय व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
जूनियर अधिकारी को बड़ी जिम्मेदारी देने पर भी आपत्ति
डॉक्टरों के एक वर्ग का कहना है कि उन्हें इस बात पर भी आपत्ति है कि अपेक्षाकृत जूनियर अधिकारी को इतना महत्वपूर्ण पद दिया गया है। उनका कहना है कि मेडिकल कॉलेजों में पीएससी से चयनित असिस्टेंट प्रोफेसर भी क्लास-वन अधिकारी होते हैं और लंबे अनुभव वाले डॉक्टर इस तरह की जिम्मेदारियां संभालते रहे हैं। डॉक्टरों ने उदाहरण देते हुए बताया कि पहले इस पद पर डीन और वरिष्ठ प्रोफेसर स्तर के अधिकारी रह चुके हैं।
चिकित्सा शिक्षा विभाग में पद की अहमियत को लेकर चर्चा
एडिशनल डायरेक्टर का पद चिकित्सा शिक्षा विभाग में महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पद से मेडिकल कॉलेजों की योजनाओं, प्रशासनिक कार्यों और शैक्षणिक व्यवस्था से जुड़े कई फैसले प्रभावित होते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे पद पर नियुक्ति करते समय चिकित्सा क्षेत्र के अनुभव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हालांकि सरकार की ओर से इस नियुक्ति को लेकर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
नए डॉक्टर यूनियन की तैयारी की चर्चा
मेडिकल टीचर एसोसिएशन की भूमिका को लेकर भी कुछ डॉक्टरों में नाराजगी बताई जा रही है। उनका कहना है कि कई मुद्दों पर संगठन की सक्रियता अपेक्षित स्तर पर नहीं दिखी। इसी कारण कुछ डॉक्टर नया संगठन बनाने की तैयारी कर रहे हैं, जो विभागीय फैसलों पर अपनी बात मजबूती से रख सके। हालांकि इस संबंध में अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।