नेतन्याहू ने माफी मांगी, विपक्ष ने किया विरोध – इज़राइल में राजनीतिक हलचल तेज…
इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भ्रष्टाचार के मामलों में माफी का अनुरोध किया है। 76 वर्षीय नेतन्याहू ने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे मुकदमे देश में विभाजन पैदा कर रहे हैं और राष्ट्रहित के लिए उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
ट्रंप ने भेजा पत्र, नेतन्याहू ने वीडियो बयान में कही ये बात
नेतन्याहू ने बिना कोई अपराध स्वीकार किए वीडियो बयान में कहा कि उनका मुकदमा लगभग छह साल से चल रहा है और कई साल तक जारी रहने की संभावना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस महीने इज़रायली राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग को पत्र लिखकर नेतन्याहू की माफी की सिफारिश की थी।
राष्ट्रपति का फैसला और 111 पन्नों का पत्र
नेतन्याहू के वकीलों ने 111 पन्नों का पत्र राष्ट्रपति हर्ज़ोग को सौंपा है। इसमें दोष स्वीकार नहीं किया गया है। राष्ट्रपति हर्ज़ोग अब इस अनुरोध पर सभी प्रासंगिक राय लेने के बाद विचार करेंगे।
समर्थक बनाम विरोधी – इज़राइल में राजनीतिक ध्रुवीकरण
नेतन्याहू के खिलाफ मामलों ने इज़रायली समाज में गहरी दरारें पैदा की हैं। उनके समर्थक मामलों को राजनीतिक साजिश मानते हैं, जबकि विपक्षी नेता इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हैं।
नेतन्याहू की योजना – 2026 चुनाव तक सत्ता में बने रहना
नेतन्याहू ने कहा कि वह 2026 के अंत तक होने वाले अगले चुनावों में भाग लेंगे। वर्तमान कार्यकाल में उन्होंने न्यायिक सुधारों का प्रस्ताव रखा था, जिसे आलोचक अदालतों को कमजोर करने वाला मानते हैं।
अदालत और सुप्रीम कोर्ट – माफी की राह कठिन
क़ानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अगर राष्ट्रपति माफी दे भी देते हैं, तो इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। इज़रायली कानून के तहत माफी केवल दोषी ठहराए गए व्यक्ति को ही दी जा सकती है।
विपक्ष का विरोध – माफी केवल दोषी को ही स्वीकार्य
वामपंथी विपक्षी नेता यायर लापिड और यायर गोलान ने कहा कि नेतन्याहू को अपराध स्वीकार करना, पश्चाताप व्यक्त करना और राजनीतिक जीवन से हटना चाहिए।
सरकार का समर्थन – समाज में दरार मिट सकती है
इज़रायल के वरिष्ठ मंत्री नेतन्याहू के अनुरोध का समर्थन कर रहे हैं। रक्षा मंत्री काट्ज़ और वित्त मंत्री स्मोट्रिच का कहना है कि इससे लगभग एक दशक से चली आ रही सामाजिक दरारें कम होंगी और नेतन्याहू को राजनीतिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
जनता की प्रतिक्रिया – लोकतंत्र का संकट?
तेल अवीव में हर्ज़ोग के घर के बाहर प्रदर्शन हुए। लोग चिंतित हैं कि नेतन्याहू न्यायिक व्यवस्था को कमजोर कर देश के लोकतंत्र को खतरे में डाल रहे हैं।