#क्राइम #राज्य-शहर

झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही ने छीनी मासूम की जिंदगी, अवैध अस्पताल में ऑपरेशन बना मौत की वजह

बिना योग्य डॉक्टर के इलाज ने ली छह साल के बच्चे की जान

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां अवैध रूप से संचालित एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान छह साल के मासूम बच्चे की मौत हो गई। आरोप है कि खुद को डॉक्टर बताने वाले दो युवकों ने बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री और विशेषज्ञ निगरानी के बच्चे का ऑपरेशन कर दिया। ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव और संक्रमण के चलते बच्चे की हालत बिगड़ती चली गई और आखिरकार उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। घटना के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया, जबकि पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

पैर की चोट के इलाज से शुरू हुआ पूरा मामला

मृतक बच्चे के पिता के अनुसार, कुछ महीने पहले उनके बेटे के पैर में चोट लगी थी, जिसके बाद एक अस्पताल में उसके पैर में रॉड डाली गई थी। बाद में रॉड निकालने के लिए परिवार दो स्थानीय युवकों के संपर्क में आया, जो खुद को सर्जन बताते थे। आरोप है कि दोनों ने बिना किसी प्रशिक्षित मेडिकल टीम या जरूरी संसाधनों के ऑपरेशन शुरू कर दिया। प्रक्रिया के दौरान बच्चे की हालत अचानक बिगड़ गई। परिवार ने बताया कि इलाज के नाम पर लगातार लापरवाही बरती गई और समय रहते सही चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण मासूम की मौत हो गई।

जांच में खुली फर्जी अस्पताल की पोल

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया कि आरोपी बिना किसी मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री के अस्पताल चला रहे थे। बताया गया कि ‘अनमोल अस्पताल’ नाम से संचालित यह निजी अस्पताल लंबे समय से नियमों की अनदेखी कर रहा था। अस्पताल का लाइसेंस किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर था, जबकि संचालन आरोपी युवक कर रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि अस्पताल पहले भी नियमों के उल्लंघन के कारण सील किया जा चुका था, लेकिन बाद में दोबारा अवैध तरीके से शुरू कर दिया गया। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज, आरोपी जेल भेजे गए

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पूछताछ के बाद दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और अस्पताल से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जाएगी। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि अवैध अस्पताल को संरक्षण किस स्तर पर मिल रहा था और वहां अब तक कितने मरीजों का इलाज किया गया। इस घटना के बाद क्षेत्र में फर्जी डॉक्टरों और अवैध क्लीनिकों के खिलाफ अभियान तेज करने की तैयारी की जा रही है।

प्रशासन की अपील- इलाज से पहले डॉक्टर की योग्यता जांचें

इस दर्दनाक घटना के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि इलाज के लिए केवल पंजीकृत और योग्य डॉक्टरों पर ही भरोसा करें। ग्रामीण और छोटे कस्बों में अक्सर कम खर्च और जल्दी इलाज के लालच में लोग झोलाछाप डॉक्टरों के पास पहुंच जाते हैं, जिसका परिणाम कई बार जानलेवा साबित होता है। स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि बिना लाइसेंस चल रहे अस्पतालों और फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसा दुख न झेलना पड़े।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *