NEET पेपर लीक में बड़ा खुलासा: दिवाली से शुरू हुई साजिश, CBI जांच में कई राज्यों तक फैला नेटवर्क बेनकाब
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में जांच अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच चुकी है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की पड़ताल में सामने आया है कि पेपर लीक की साजिश परीक्षा से कई महीने पहले ही रची जा चुकी थी। शुरुआती जांच में राजस्थान के सीकर को इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख केंद्र माना जा रहा है। वहीं जयपुर, हरियाणा और महाराष्ट्र तक फैले संपर्कों ने इस मामले को राष्ट्रीय स्तर का संगठित नेटवर्क बना दिया है। CBI अब उन छात्रों और परिवारों की भूमिका भी खंगाल रही है, जिनके हालिया मेडिकल एडमिशन संदिग्ध माने जा रहे हैं।
दिवाली के समय ही शुरू हो गई थी पेपर लीक की तैयारी
जांच एजेंसियों के अनुसार NEET परीक्षा से काफी पहले ही कुछ लोगों को यह भरोसा दिला दिया गया था कि इस बार परीक्षा का पेपर उपलब्ध करा दिया जाएगा। सूत्रों का दावा है कि दीपावली के दौरान ही इस कथित साजिश की बुनियाद रखी गई थी। CBI को मिले शुरुआती इनपुट से संकेत मिले हैं कि परीक्षा से महीनों पहले छात्रों और बिचौलियों के बीच संपर्क शुरू हो चुके थे। इसी आधार पर एजेंसी अब उन लोगों की पहचान कर रही है, जिन्होंने पेपर उपलब्ध कराने, रकम जुटाने और छात्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने में भूमिका निभाई। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि नेटवर्क कितने स्तरों पर सक्रिय था।
जयपुर से गिरफ्तारी, दिल्ली में होगी गहन पूछताछ
CBI ने इस मामले में जयपुर से चार प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, हरियाणा निवासी यश यादव और विकास नामक युवक शामिल हैं। सभी को अदालत में पेश करने के बाद ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली ले जाया गया है। एजेंसी को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। जांच अधिकारियों का मानना है कि यह सिर्फ स्थानीय स्तर का मामला नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क है, जिसमें कई राज्यों के लोग जुड़े हो सकते हैं। एजेंसी इलेक्ट्रॉनिक डाटा, कॉल रिकॉर्ड और आर्थिक लेनदेन की भी जांच कर रही है।
सीकर बना पूरे नेटवर्क का मुख्य केंद्र
CBI जांच में राजस्थान का सीकर शहर इस पूरे मामले का अहम केंद्र बनकर सामने आया है। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी यश यादव और विकास एक ही कोचिंग संस्थान में पढ़ते थे, जहां से उनके बीच संपर्क बढ़ा। इसके बाद कथित तौर पर परीक्षा से जुड़ा नेटवर्क तैयार किया गया। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या कोचिंग से जुड़े अन्य लोग भी इस पूरे खेल में शामिल थे। सीकर में CBI और अन्य एजेंसियों की टीमें लगातार छापेमारी और पूछताछ कर रही हैं। कई छात्रों और अभिभावकों को भी निगरानी में रखा गया है।
मेडिकल छात्राएं और रिश्तेदार भी जांच के दायरे में
जांच अब सिर्फ मुख्य आरोपियों तक सीमित नहीं रही। एजेंसी उन रिश्तेदारों और परिचितों की भी जांच कर रही है, जिन्होंने हाल के वर्षों में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाया है। कुछ मेडिकल छात्राओं और छात्रों के एडमिशन रिकॉर्ड, परीक्षा प्रदर्शन और संपर्कों की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियों को शक है कि कहीं परीक्षा में अवैध मदद लेकर प्रवेश तो हासिल नहीं किया गया। इसी वजह से कई छात्रों से पूछताछ की जा रही है और उनके डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। हालांकि एजेंसी ने अभी किसी छात्र को दोषी घोषित नहीं किया है।
महाराष्ट्र से हरियाणा होते हुए राजस्थान पहुंचा पेपर
जांच में सामने आया है कि कथित पेपर सबसे पहले महाराष्ट्र के एक व्यक्ति तक पहुंचा था। वहां से यह अलग-अलग संपर्कों के जरिए हरियाणा और फिर राजस्थान पहुंचाया गया। एजेंसियों के अनुसार नेटवर्क बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा था, जिसमें अलग-अलग राज्यों के बिचौलिए सक्रिय थे। CBI अब इस पूरे चैन को जोड़ने में लगी हुई है कि पेपर कहां से निकला, किसके जरिए आगे बढ़ा और किन छात्रों तक पहुंचा। इसके साथ ही आर्थिक लेनदेन और कथित रकम की जांच भी की जा रही है।
फरार आरोपियों की तलाश, बड़े खुलासों की उम्मीद
इस मामले में कुछ आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए कई राज्यों में टीमें भेजी गई हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। दिल्ली में चल रही पूछताछ के दौरान कई सफेदपोश और प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने देश की परीक्षा प्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच इस मामले को लेकर भारी नाराजगी और चिंता का माहौल बना हुआ है।