राजस्थान में पहचान चोरी का बड़ा मामला: जूता कारीगर के नाम पर फर्जी कंपनी, 6.78 करोड़ का GST नोटिस
राजस्थान के बालोतरा जिले से पहचान चोरी (Identity Theft) और कथित जीएसटी धोखाधड़ी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। महज 10 से 15 हजार रुपये मासिक कमाने वाले एक जूता कारीगर को 6.78 करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी रिकवरी नोटिस मिला है। पीड़ित का दावा है कि उसके नाम पर बिना जानकारी के फर्जी कंपनी पंजीकृत कर करोड़ों रुपये का कारोबार दिखाया गया। मामले के सामने आने के बाद संबंधित बैंक खाता भी फ्रीज कर दिया गया है और अब जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
कारीगर के नाम पर कथित फर्जी एक्सपोर्ट कंपनी का पंजीकरण
गुड़ामालानी के जीनगर मोहल्ला निवासी जितेंद्र कुमार जीनगर को तमिलनाडु के वाणिज्यिक कर विभाग के कृष्णगिरि-2 असेसमेंट सर्किल से 6,78,97,357 रुपये की बकाया राशि का रिकवरी नोटिस प्राप्त हुआ। जितेंद्र का कहना है कि उन्होंने कभी कोई कंपनी स्थापित नहीं की और न ही उनका तमिलनाडु में किसी प्रकार का व्यापारिक संबंध रहा है। उनके अनुसार, वर्ष 2018 में एक निजी फाइनेंस कंपनी से ऋण लेने के दौरान जमा कराए गए पैन और आधार दस्तावेजों का कथित रूप से दुरुपयोग कर उनके नाम पर “श्री शिवम एक्सपोर्ट्स” नामक फर्जी कंपनी का पंजीकरण करा दिया गया।
करोड़ों का कारोबार दिखाकर GST चोरी का आरोप
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पीड़ित के पैन कार्ड का इस्तेमाल कर वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2019-20 के बीच कागजों में करोड़ों रुपये का कारोबार दर्शाया गया और जीएसटी देनदारी उत्पन्न हुई। 25 जुलाई को जब जितेंद्र अपने बैंक पहुंचे तो उन्हें जानकारी मिली कि तमिलनाडु वाणिज्यिक कर विभाग के निर्देश पर उनका बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पीड़ित और उसका परिवार गहरे सदमे में है, क्योंकि जिस कारोबारी गतिविधि का आरोप लगाया गया है, उससे उनका कोई संबंध होने से वे इनकार कर रहे हैं।
अधिकारियों ने साइबर अपराध की आशंका जताई
बालोतरा के वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों ने इसे प्रथम दृष्टया पैन कार्ड के दुरुपयोग और पहचान चोरी (Identity Theft) से जुड़ा मामला बताया है। अधिकारियों ने पीड़ित को साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराने की सलाह दी है। जांच के दौरान फर्जी कंपनी के पंजीकरण में उपयोग किए गए मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, बैंक खाते और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जाएगी, ताकि इस कथित फर्जीवाड़े के पीछे शामिल लोगों की पहचान की जा सके। फिलहाल संबंधित एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं।
गरीब परिवार पर बढ़ा आर्थिक संकट
जितेंद्र कुमार का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। वह जूते बनाकर हर महीने लगभग 10 से 15 हजार रुपये की आय से परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान निर्माण शुरू होने के बाद उनका पुराना कच्चा घर तोड़ दिया गया था और परिवार फिलहाल छोटे भाई के घर रह रहा है। बैंक खाता फ्रीज होने के कारण उनकी दैनिक जरूरतों और निर्माण कार्य पर भी असर पड़ा है। पीड़ित ने निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और अपने नाम से जुड़े कथित फर्जी रिकॉर्ड हटाने की मांग की है।
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