जंतर-मंतर प्रदर्शन पर कानूनी विवाद, CJP संस्थापक और प्रवक्ता के खिलाफ POCSO के तहत शिकायत
दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन को लेकर नया विवाद सामने आया है। प्रदर्शन में कथित तौर पर 12 वर्षीय बच्चे की मौजूदगी को आधार बनाते हुए अधिवक्ता रिंकी चटर्जी सिंह ने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में जीरो FIR दर्ज करने के लिए शिकायत दी है। शिकायत में CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, प्रवक्ता सौरभ दास और अन्य आयोजकों के खिलाफ POCSO एक्ट एवं भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत जांच की मांग की गई है। फिलहाल यह केवल शिकायत है, आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
12 वर्षीय बच्चे की मौजूदगी को लेकर दर्ज कराई गई शिकायत
20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के बाद एक कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। अधिवक्ता रिंकी चटर्जी सिंह ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन में एक 12 वर्षीय बच्चे को शामिल किया गया, जिसे लेकर कानून के संभावित उल्लंघन की जांच आवश्यक है। इसी आधार पर उन्होंने सिलीगुड़ी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में जीरो FIR दर्ज करने के लिए आवेदन दिया है। शिकायत में CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, प्रवक्ता सौरभ दास और अन्य आयोजकों की भूमिका की जांच की मांग की गई है। हालांकि, अभी तक पुलिस की ओर से नियमित FIR दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
POCSO और BNS की धाराओं का हवाला
शिकायत में पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की धारा 13, 14 और 15 के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 153 का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि नाबालिग बच्चे की प्रदर्शन में मौजूदगी की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन के बाद जारी कुछ वीडियो और सार्वजनिक बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कानूनी समीक्षा आवश्यक है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए सभी आरोप फिलहाल शिकायतकर्ता के दावे हैं और किसी सक्षम न्यायालय या जांच एजेंसी द्वारा इनकी पुष्टि नहीं की गई है।
फंडिंग और आयोजन की जांच की भी मांग
शिकायत में प्रदर्शन के आयोजन और उसके वित्तीय स्रोतों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि कार्यक्रम के लिए इस्तेमाल किए गए धन के स्रोत, खर्च और संबंधित वित्तीय लेन-देन की जांच कराई जाए। इसके साथ ही आयोजकों की भूमिका और आयोजन प्रक्रिया की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसी कानून या नियम का उल्लंघन हुआ या नहीं। फिलहाल यह सभी बिंदु शिकायत का हिस्सा हैं और जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।
आरोपों पर CJP की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस मामले में अभी तक CJP, उसके संस्थापक अभिजीत दीपके या प्रवक्ता सौरभ दास की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस भी फिलहाल शिकायत की जांच की प्रक्रिया में है और नियमित FIR दर्ज होने या आगे की कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। ऐसे में मामला प्रारंभिक कानूनी प्रक्रिया के चरण में है और जांच पूरी होने के बाद ही तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
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