LAC पर चीन की नई चाल! सैटेलाइट तस्वीरों में सड़क, हेलीपैड और सैन्य ढांचे का दावा, बढ़ीं रणनीतिक चिंताएं
भारत-चीन सीमा पर एक बार फिर चीन की गतिविधियां चर्चा में हैं। हालिया सैटेलाइट तस्वीरों में तिब्बत से सटे क्षेत्र में नई सड़क, निर्माण स्थल और अन्य बुनियादी ढांचे के संकेत मिले हैं। रिपोर्टों के अनुसार, यह निर्माण उस इलाके के करीब है जिस पर भारत अपना ऐतिहासिक दावा करता है। हालांकि, भारतीय सेना ने हाल में सामने आए घुसपैठ के कुछ दावों का खंडन किया है। ऐसे में सीमा पर चीन की गतिविधियों को लेकर रणनीतिक बहस तेज हो गई है।
सैटेलाइट तस्वीरों में सामने आई नई गतिविधियां
हाल में सार्वजनिक हुई सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण में तिब्बत-भारत सीमा के पास चीन द्वारा सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के संकेत मिले हैं। रिपोर्टों के अनुसार, यह क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश से सटा हुआ है और भारत के ऐतिहासिक दावे वाले इलाके के निकट स्थित है। इन तस्वीरों में सड़क नेटवर्क के विस्तार के साथ निर्माण स्थल और कुछ सैन्य उपयोग से जुड़े ढांचों की भी पहचान होने का दावा किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मैकमोहन रेखा और LAC को लेकर दोनों देशों का अलग नजरिया
भारत और चीन के बीच पूर्वी सेक्टर में सीमा विवाद की जड़ मैकमोहन रेखा को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण है। भारत मैकमोहन रेखा को अपनी वैध अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, जबकि चीन इसे स्वीकार नहीं करता। 1962 के युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के आधार पर सैन्य तैनाती और गश्त होती है। भारत आज भी अपने ऐतिहासिक दावे से पीछे नहीं हटा है, जबकि दोनों देशों के बीच सीमा का अंतिम समाधान अभी तक नहीं हो सका है।
भारतीय सेना ने घुसपैठ के दावों को किया था खारिज
हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के एक स्थानीय संगठन ने आरोप लगाया था कि चीनी सेना ने भारतीय सीमा के भीतर सड़क और सैन्य ढांचे बनाए हैं। इस पर भारतीय सेना ने आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि ऐसी रिपोर्टें तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं और भारतीय क्षेत्र में किसी नई घुसपैठ की पुष्टि नहीं हुई है। सेना का कहना है कि सीमा की लगातार निगरानी की जा रही है और सभी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
सड़क, गांव और हेलीपैड निर्माण से बढ़ीं रणनीतिक चिंताएं
रिपोर्टों के अनुसार, चीन पिछले कुछ वर्षों से सीमा के निकट सड़क, पुल, गांव और अन्य सैन्य बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार कर रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों में एक नई सड़क से जुड़े गांव, निर्माण परिसर और दो हेलीपैड जैसी संरचनाओं के संकेत मिलने का दावा किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे निर्माण भविष्य में सैन्य रसद, त्वरित तैनाती और सीमा क्षेत्रों में परिचालन क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
अरुणाचल सीमा पहले भी रही है संवेदनशील
अरुणाचल प्रदेश से लगी सीमा लंबे समय से भारत-चीन विवाद का प्रमुख केंद्र रही है। वर्ष 2017 में डोकलाम गतिरोध और उसके बाद पूर्वी लद्दाख में बढ़े तनाव ने सीमा पर बुनियादी ढांचे के महत्व को और बढ़ा दिया। समय-समय पर राजनीतिक और सैन्य स्तर पर भी इस क्षेत्र को लेकर चिंता जताई जाती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पर दोनों देशों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखना और कूटनीतिक संवाद बनाए रखना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।