कोटा में झोलाछाप के इलाज से बिगड़ी युवक की हालत, चेहरा फूला और उंगलियां पड़ीं काली
राजस्थान के कोटा में त्वचा रोग का इलाज कराने गए एक युवक की हालत कथित तौर पर लंबे समय तक स्टेरॉयड के इंजेक्शन लेने के बाद गंभीर हो गई। बारां जिले के छीपाबड़ौद निवासी महेन्द्र को करीब चार साल तक हाई डोज स्टेरॉयड दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद उसका वजन बढ़ा, चेहरा फूल गया और पेट पर बैंगनी धारियां पड़ गईं। हाथ-पैर की उंगलियां भी काली पड़ने लगीं। पैर में ऐसा घाव हो गया, जो लंबे समय तक नहीं भरा। बाद में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, कोटा में डॉक्टरों ने जांच और उपचार किया। अब उसकी हालत में सुधार बताया जा रहा है।
त्वचा रोग के इलाज के लिए युवक ने लिया था उपचार
जानकारी के अनुसार, बारां जिले के छीपाबड़ौद निवासी महेन्द्र त्वचा संबंधी परेशानी से जूझ रहा था। इसी के उपचार के लिए वह एक झोलाछाप के पास गया था। आरोप है कि उसे करीब चार साल तक हाई डोज स्टेरॉयड के इंजेक्शन दिए गए। लंबे समय तक इस तरह की दवा लेने के बाद उसके शरीर में कई बदलाव दिखाई देने लगे। उसका वजन बढ़ने लगा और चेहरा फूल गया। शुरुआत में इन लक्षणों को सामान्य समझा गया, लेकिन समय के साथ परेशानी बढ़ती गई। बाद में हाथ-पैर की उंगलियां काली पड़ने लगीं और पैर में गंभीर घाव हो गया।
चार साल तक स्टेरॉयड लेने के बाद दिखे गंभीर लक्षण
महेन्द्र के शरीर पर स्टेरॉयड के संभावित दुष्प्रभाव दिखाई देने लगे। उसका चेहरा गोल और फूला हुआ हो गया। पेट पर बैंगनी रंग की धारियां भी उभर आईं। इसके अलावा, हाथ-पैर की उंगलियां काली पड़ने लगीं और पैर का घाव लंबे समय तक ठीक नहीं हुआ। उंगलियों का काला पड़ना रक्त प्रवाह में गंभीर समस्या या गैंग्रीन जैसी स्थिति का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराना जरूरी होता है। हालांकि, मरीज में उंगलियों की स्थिति की सटीक वजह और गंभीरता का निर्धारण चिकित्सकीय जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।
जांच में सामने आया कुशिंग सिंड्रोम
मरीज की हालत बिगड़ने पर उसे कोटा के राजकीय मेडिकल कॉलेज से जुड़े सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद कुशिंग सिंड्रोम सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का आकलन किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, महेन्द्र हाई ब्लड प्रेशर और हड्डियों की कमजोरी से भी परेशान था। कुशिंग सिंड्रोम में शरीर पर लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा कोर्टिसोल हार्मोन का असर पड़ता है। इससे वजन बढ़ना, चेहरा गोल होना और त्वचा पर धारियां पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का इस्तेमाल भी इस तरह की स्थिति पैदा कर सकता है।
तीन विभागों के डॉक्टरों ने मिलकर किया इलाज
महेन्द्र का उपचार कोटा के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में किया गया। एंडोक्राइनोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. नितेश कुमार बौद्ध की देखरेख में तीन विभागों के डॉक्टरों ने मिलकर इलाज किया। मरीज को कुशिंग सिंड्रोम, हाई ब्लड प्रेशर, हड्डियों की कमजोरी और उंगलियों से जुड़ी समस्याओं को ध्यान में रखकर उपचार दिया गया। ऐसे जटिल मामलों में अलग-अलग विशेषज्ञों की निगरानी जरूरी हो सकती है। अस्पताल में उपचार के बाद युवक की हालत में सुधार होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, आगे की देखभाल और नियमित जांच भी उसके स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी।
स्टेरॉयड का बिना निगरानी इस्तेमाल हो सकता है नुकसानदायक
स्टेरॉयड कुछ बीमारियों के उपचार में उपयोगी दवाएं हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह और निगरानी में ही किया जाना चाहिए। लंबे समय तक या अधिक मात्रा में स्टेरॉयड लेने से शरीर पर गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इनमें वजन बढ़ना, चेहरे में बदलाव, हाई ब्लड प्रेशर, हड्डियों की कमजोरी और त्वचा संबंधी समस्याएं शामिल हैं। दवा की मात्रा और अवधि मरीज की बीमारी के अनुसार तय की जाती है। इसलिए त्वचा रोग या किसी अन्य परेशानी के लिए बिना योग्य डॉक्टर की सलाह इंजेक्शन नहीं लगवाने चाहिए। यदि दवा लंबे समय से ली जा रही है, तो उसे अचानक बंद करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
झोलाछाप से इलाज कराने को लेकर फिर उठे सवाल
इस घटना ने बिना योग्य चिकित्सकीय सलाह इलाज कराने के जोखिम को सामने ला दिया है। त्वचा संबंधी परेशानी होने पर सही जांच और प्रमाणित उपचार जरूरी है। केवल लक्षणों को दबाने के लिए लंबे समय तक इंजेक्शन लेना गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। मरीज की हालत बिगड़ने पर समय पर विशेषज्ञ अस्पताल पहुंचना भी महत्वपूर्ण होता है। महेन्द्र के मामले में कथित रूप से दिए गए इंजेक्शन, उनकी मात्रा और उपचार की पूरी परिस्थितियों की पुष्टि संबंधित चिकित्सकीय रिकॉर्ड से की जा सकती है। फिलहाल, अस्पताल में उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार बताया गया है।