केतन अग्रवाल केस: मौत के बाद सिया के पास रहा मोबाइल, पुलिस को डेटा छेड़छाड़ की आशंका, डिजिटल जांच तेज
पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल मर्डर केस में जांच अब डिजिटल सबूतों पर केंद्रित हो गई है। पुलिस के अनुसार, केतन की मौत के बाद उसका मोबाइल फोन कुछ घंटों तक उसकी मंगेतर सिया गोयल के पास रहा। इसके बाद फोन परिवार को सौंप दिया गया। इस घटनाक्रम को लेकर पुलिस को संदेह है कि मोबाइल डेटा से छेड़छाड़ की गई हो सकती है, जिसकी जांच साइबर और फोरेंसिक टीम कर रही है।
मोबाइल फोन बना अहम सबूत, डेटा की गहन जांच शुरू
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में मोबाइल फोन को एक महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य माना जा रहा है। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि फोन में मौजूद कॉल रिकॉर्ड, चैट और अन्य डेटा को डिलीट या बदला तो नहीं गया। इसके लिए डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। पुलिस का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि फोन के साथ क्या गतिविधि हुई, लेकिन हर संभावना की जांच की जा रही है।
क्राइम सीन रीक्रिएशन और लोहागढ़ फोर्ट जांच
केतन अग्रवाल की मौत 18 जून को पुणे के लोहागढ़ फोर्ट क्षेत्र में कथित तौर पर धक्का दिए जाने से हुई थी। पुलिस का आरोप है कि इस घटना में सिया गोयल और चेतन चौधरी की भूमिका रही। दोनों को 23 जून को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। जांच के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों को लोहागढ़ फोर्ट ले जाकर क्राइम सीन का रीक्रिएशन कराया, ताकि घटनाक्रम को तकनीकी और भौतिक रूप से समझा जा सके।
गेट एनालिसिस से आरोपी की चाल-ढाल की जांच
पुलिस ने इस मामले में गेट एनालिसिस (चलने की शैली का विश्लेषण) की प्रक्रिया भी शुरू की है। इस तकनीक के जरिए यह जांच की जा रही है कि घटनास्थल पर देखे गए व्यक्ति और आरोपी चेतन चौधरी की चाल-ढाल में समानता है या नहीं। बचाव पक्ष का दावा है कि सीसीटीवी या वीडियो में दिख रहा व्यक्ति चेतन नहीं है, जिसकी पुष्टि के लिए यह वैज्ञानिक जांच की जा रही है।
पुराने शक और रिश्तों की पड़ताल भी जारी
जांच में यह भी सामने आया है कि मृतक केतन को पहले से सिया और चेतन की नजदीकियों पर संदेह था। परिवार के अनुसार, उसने शादी से पहले बैकग्राउंड जांच कराने की बात भी कही थी। पुलिस अब इन सभी बिंदुओं को जोड़कर पूरे घटनाक्रम की कड़ी को समझने की कोशिश कर रही है।