‘भगवान को नहीं देखा, इसलिए पूजा-पाठ नहीं करता’, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का बड़ा बयान
केंद्रीय मंत्री और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने भगवान, पूजा-पाठ और आस्था को लेकर अपनी व्यक्तिगत राय व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वे भगवान को नहीं देखा है, इसलिए पूजा-पाठ नहीं करते। उनके अनुसार, माता-पिता ही सबसे बड़े पूजनीय हैं और उनके आशीर्वाद से ही उन्हें जीवन में सफलता मिली।
‘भगवान को नहीं देखा, इसलिए पूजा नहीं करता’
गया जिले के अतरी स्थित अपने पैतृक आवास पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान जीतन राम मांझी ने कहा कि वे भगवान के अस्तित्व पर व्यक्तिगत रूप से कोई दावा नहीं करते, क्योंकि उन्होंने भगवान को देखा नहीं है। उन्होंने कहा कि केवल दिखावे के लिए पूजा-पाठ करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, यदि कोई अपने माता-पिता का सम्मान नहीं करता और केवल धार्मिक कर्मकांड करता है, तो उसका कोई विशेष महत्व नहीं है।
माता-पिता को बताया सबसे बड़ा भगवान
मांझी ने कहा कि उनके लिए माता-पिता ही साक्षात ब्रह्मा, विष्णु और भगवान के समान हैं। उन्होंने अपने जीवन संघर्ष का जिक्र करते हुए बताया कि उनके माता-पिता ने मजदूरी कर उन्हें पढ़ाया-लिखाया और आगे बढ़ने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि आज जो भी मुकाम उन्हें मिला है, उसमें उनके माता-पिता के त्याग और आशीर्वाद की सबसे बड़ी भूमिका है।
संघर्षों को याद कर हुए भावुक
कार्यक्रम के दौरान मांझी ने अपने बचपन की कठिन परिस्थितियों को याद किया। उन्होंने कहा कि गरीब परिवार में जन्म लेने के बावजूद उनके माता-पिता ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने खेती और परिवार की परंपरा का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वे आज भी अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं और अपने पूर्वजों की स्मृति को सम्मान देने का प्रयास कर रहे हैं।
पूर्वजों की प्रतिमाओं का किया अनावरण
जीतन राम मांझी अपने पैतृक गांव में पूर्वजों की प्रतिमाओं के अनावरण कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस अवसर पर बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन, पार्टी के वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान मांझी ने परिवार, संस्कार और माता-पिता के सम्मान को जीवन का सबसे बड़ा मूल्य बताया।
बयान पर छिड़ सकती है सियासी बहस
जीतन राम मांझी अपने बेबाक बयानों के लिए अक्सर चर्चा में रहते हैं। भगवान और पूजा-पाठ को लेकर दिया गया उनका यह ताजा बयान भी राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनकी व्यक्तिगत सोच है और उनका उद्देश्य माता-पिता के सम्मान का संदेश देना है।