अमरनाथ यात्रा 2026 से पहले जम्मू-कश्मीर हाई अलर्ट, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
3 जुलाई से शुरू होने वाली 57 दिवसीय अमरनाथ यात्रा 2026 से पहले जम्मू-कश्मीर में “अधिकतम अलर्ट” जारी कर दिया गया है। खुफिया रिपोर्ट में 45 विदेशी आतंकवादियों की मौजूदगी और संभावित खतरे के इनपुट के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी है। यात्रा मार्गों पर CRPF, सेना और CAPF की बड़ी तैनाती की गई है ताकि तीर्थयात्रा को सुरक्षित और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया जा सके।
सुरक्षा एजेंसियों का हाई अलर्ट प्लान
खुफिया इनपुट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में लगभग 45 विदेशी आतंकवादी सक्रिय हैं, जिनमें से 36 के अमरनाथ यात्रा मार्ग पर अशांति फैलाने की आशंका जताई गई है। इसके चलते सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र को हाई अलर्ट पर रखा है। बताया गया है कि ये आतंकी जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैबा से जुड़े हो सकते हैं। सुरक्षा बलों ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी और सर्च ऑपरेशन तेज कर दिए हैं।
हर किलोमीटर पर CRPF की तैनाती
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए यात्रा मार्ग पर हर एक किलोमीटर पर CRPF के मोबाइल शिविर स्थापित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य त्वरित प्रतिक्रिया और लगातार निगरानी सुनिश्चित करना है। साथ ही लखनपुर से लेकर अमरनाथ गुफा तक सुरक्षा बलों की परतदार तैनाती की गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके।670 CAPF कंपनियों की बड़ी तैनाती
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अमरनाथ यात्रा के लिए 670 CAPF कंपनियों की तैनाती को मंजूरी दी है। ये बल बेस कैंप, पहाड़ी क्षेत्रों, जंगल मार्गों और प्रमुख ट्रांजिट रूट्स पर तैनात रहेंगे। निगरानी के लिए सीसीटीवी, फेस रिकग्निशन सिस्टम और क्यूआर कोड आधारित पहचान प्रणाली भी लागू की गई है।
निगरानी, ड्रिल और यातायात प्रबंधन
प्रशासन ने सुरक्षा तैयारियों को परखने के लिए कई मॉक ड्रिल आयोजित किए हैं, जिनमें सेना, CRPF, पुलिस और SDRF शामिल रहे। इसके अलावा किरायेदार सत्यापन अभियान और यात्रा मार्गों पर ट्रैफिक एडवाइजरी भी जारी की गई है। जम्मू से बालटाल और पहलगाम रूट पर वाहनों की आवाजाही के लिए समय सीमा तय की गई है ताकि तीर्थयात्रा सुचारु रूप से चल सके।