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कैराकल संरक्षण के लिए जैसलमेर में ‘बकरी बैंक’ पहल, शिकार पर मुआवजे की जगह तुरंत मिलेगी नई बकरी

राजस्थान के जैसलमेर में दुर्लभ वन्यजीव कैराकल (सियागोश) के संरक्षण के लिए एक अनोखी पहल शुरू होने जा रही है। ‘बकरी बैंक’ योजना के तहत यदि कैराकल किसी पशुपालक की बकरी का शिकार करता है, तो लंबी मुआवजा प्रक्रिया के बजाय तुरंत दूसरी बकरी उपलब्ध कराई जाएगी। इस पहल का उद्देश्य वन्यजीव और इंसानों के बीच बढ़ते टकराव को कम करना और ग्रामीणों में संरक्षण के प्रति विश्वास बढ़ाना है।

कैराकल संरक्षण की दिशा में अनोखी पहल

जैसलमेर में वन विभाग और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के संयुक्त प्रयास से ‘बकरी बैंक’ योजना शुरू की जा रही है, जो राज्य में अपनी तरह की पहली पहल होगी। इसका मुख्य उद्देश्य दुर्लभ कैराकल प्रजाति को बचाना है, जो भारत में विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी है। यह योजना खासतौर पर उन इलाकों में लागू होगी जहां कैराकल की मौजूदगी दर्ज की गई है। विभाग का मानना है कि इस पहल से ग्रामीणों में सकारात्मक सोच विकसित होगी और वे वन्यजीवों के प्रति आक्रामक रुख अपनाने से बचेंगे।

मुआवजे की जगह तुरंत राहत की व्यवस्था

इस योजना के तहत यदि किसी पशुपालक की बकरी का शिकार कैराकल करता है, तो उसे सरकारी प्रक्रिया के तहत मुआवजा मिलने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके बजाय ‘बकरी बैंक’ से तुरंत एक स्वस्थ बकरी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे प्रभावित परिवार को आर्थिक नुकसान से तत्काल राहत मिलेगी। अक्सर मुआवजा मिलने में देरी के कारण ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती है, जो कई बार वन्यजीवों के प्रति हिंसा का कारण बनती है। यह नई व्यवस्था उस समस्या का व्यावहारिक समाधान मानी जा रही है।

घटना के बाद लिया गया अहम निर्णय

मार्च 2026 में जैसलमेर के सरहदी इलाके में एक कैराकल द्वारा करीब 50 बकरियों के शिकार की घटना सामने आई थी। इस घटना से नाराज ग्रामीणों ने कैराकल का पीछा कर उसे मार डाला था। इस घटना ने वन विभाग को यह सोचने पर मजबूर किया कि यदि समय पर राहत दी जाए तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। इसी पृष्ठभूमि में ‘बकरी बैंक’ जैसी योजना की रूपरेखा तैयार की गई, ताकि ग्रामीणों और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाया जा सके।

सीमित संख्या में बचे हैं कैराकल

वन विभाग के अनुसार देश में कैराकल की संख्या बेहद कम रह गई है और अनुमानित रूप से केवल 50 के आसपास ही बचे हैं। जैसलमेर क्षेत्र में तो केवल चार कैराकल के एक छोटे परिवार की पुष्टि हुई है। भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे इलाकों में इनकी मौजूदगी पाई गई है। इतनी कम संख्या होने के कारण इनका संरक्षण बेहद जरूरी हो गया है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह प्रजाति पूरी तरह समाप्त हो सकती है।

कैसे काम करेगा ‘बकरी बैंक’ मॉडल

योजना के तहत चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में ‘बकरी बैंक’ स्थापित किए जाएंगे, जहां शुरुआत में करीब 25 स्वस्थ बकरियां रखी जाएंगी। जरूरत पड़ने पर प्रभावित पशुपालकों को यहीं से बकरी दी जाएगी। इस मॉडल को टिकाऊ बनाने के लिए नियम बनाया गया है कि लाभार्थी को बाद में बकरी की एक संतान बैंक को वापस देनी होगी। इससे बैंक का स्टॉक लगातार बढ़ता रहेगा और अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सकेगा। यह व्यवस्था आत्मनिर्भर और दीर्घकालिक समाधान के रूप में तैयार की गई है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने की कोशिश

इस पूरी पहल का मूल उद्देश्य मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करना है। जब ग्रामीणों को यह भरोसा होगा कि उनके नुकसान की भरपाई तुरंत होगी, तो वे वन्यजीवों के प्रति हिंसक प्रतिक्रिया नहीं देंगे। वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया की टीम जल्द ही प्रभावित क्षेत्रों की मैपिंग करेगी, जिससे योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहा, तो इसे देश के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा सकता है।

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